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Nepali Chicken Sukuti Recipe: देहरादून की वादियों में मोमोज की खूशबू तो सालों से रची-बसी है, लेकिन अब यहाँ के नॉन-वेज लवर्स की जुबान पर एक नया नाम चढ़ गया है ‘नेपाली चिकन सिकुटी’. पारंपरिक कबाबों और टिक्कों के शौकीन अब इस स्मोकी और क्रिस्पी नेपाली व्यंजन की ओर खिंचे चले जा रहे हैं. अपनी खास खुशबू और लाजवाब जायके के कारण चिकन सिकुटी न केवल होटलों बल्कि घरों की रसोई में भी अपनी जगह बना रही है. आइए जानते हैं क्या है इस डिश की खासियत और कैसे इसे पारंपरिक और आधुनिक तरीके से तैयार किया जाता है.

Nepali Chicken Sukuti Recipe: देहरादून के फूड कल्चर में इन दिनों नेपाली चिकन सिकुटी की भारी धूम देखने को मिल रही है. वैसे तो दूनवासी मोमोज़ के पहले से ही दीवाने हैं, लेकिन अब शहर के नॉन-वेज लवर्स की पसंद धीरे-धीरे पारंपरिक कबाबों से हटकर इस स्मोकी नेपाली डिश की ओर मुड़ रही है. चिकन सिकुटी की सबसे बड़ी खूबी इसका बनाने का तरीका और इसमें आने वाला खास स्मोकी फ्लेवर है, जो इसे अन्य चिकन डिशेज से बिल्कुल अलग बनाता है.

झटपट तैयार करने की विधि
देहरादून निवासी अलीशा ने चिकन सिकुटी बनाने की बारीकियों को साझा किया. उन्होंने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इसे तैयार करने के लिए बोनलेस चिकन का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले चिकन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उबाल लिया जाता है. इसे धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक कि इसका पानी पूरी तरह सूख न जाए.

इसके बाद, एक बर्तन में जीरा, मैथी, कलौंजी, सौंफ, सरसों और राई को अच्छे से रोस्ट किया जाता है. तड़के के लिए दूसरे बर्तन में सरसों का तेल गर्म करके उसमें साबुत लाल मिर्च भून ली जाती है. स्वाद को बढ़ाने के लिए अदरक, लहसुन और गर्म मसाले का ग्राइंड किया हुआ पेस्ट इस्तेमाल होता है. अंत में गर्म तेल में प्याज, हरी मिर्च, अदरक और भुने हुए मसालों के साथ चिकन और मीट मसाला डालकर इसे अच्छी तरह मिला लिया जाता है.

सिकुटी बनाने का पारंपरिक और स्मोकी तरीका
अलीशा ने बताया कि पहले के समय में इसे बनाने का तरीका काफी अलग और धैर्य वाला था. पारंपरिक रूप से सिकुटी तैयार करने के लिए चिकन या मटन को बेहद पतली-पतली लेयर (स्ट्रिप्स) में काटा जाता था. इन लेयर्स को कड़ी धूप में सुखाया जाता था. सबसे खास बात यह थी कि इन्हें किचन की छत पर इस तरह लटकाया जाता था कि चूल्हे से निकलने वाला लकड़ी का धुआं लगातार इन पर लगता रहे.

यह स्मोकी फ्लेवर लाने का एक प्राचीन और खास तरीका था, जिससे मांस की विशिष्ट गंध भी चली जाती थी. सुखाने से पहले मांस पर अदरक-लहसुन का पेस्ट, नमक, जीरा, काली मिर्च, मिर्च पाउडर और हल्दी जैसे मसाले लगाए जाते थे. इसे सुखाने के लिए सूती कपड़े का भी इस्तेमाल होता था.

लंबे समय तक स्टोर करने की सुविधा
सिकुटी की एक बड़ी विशेषता यह है कि एक बार जब यह अच्छी तरह सूख जाती है, तो इसे अचार की तरह तैयार किया जाता है. पारंपरिक तरीके से बनी इस सिकुटी को लंबे समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है और जब मन चाहे तब इसे फ्राई करके स्नैक्स या साइड डिश के रूप में सर्व किया जा सकता है. यही वजह है कि देहरादून के लोग अब इस पारंपरिक नेपाली स्वाद को हाथों-हाथ ले रहे हैं.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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