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Google का ग्लोबल सर्च मार्केट शेयर नवंबर 2025 में 89.94 प्रतिशत पहुंचा गया. बाकी सर्च इंजन इसके आसपास भी कहीं नहीं है. दूसरे स्थान पर 4.22 फीसदी मार्केट शेयर के साथ माइक्रोसॉफ्ट का बिंग है. केवल 10 परसेंट मार्केट शेयर में बाकी सारे सर्च इंजन सिमटे हुए हैं.

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नई दिल्ली. 2025 खत्म होने को है और सर्च इंजन की दुनिया में तस्वीर बिल्कुल साफ है. गूगल (Google) का दबदबा न सिर्फ कायम है बल्कि और मजबूत हुआ है. नवंबर 2025 के स्टैटकाउंटर (StatCounter) डेटा के मुताबिक ग्लोबल सर्च मार्केट में गूगल की हिस्सेदारी 89.94 प्रतिशत पहुंच चुकी है. इसका सीधा मतलब है कि हर 100 में से करीब 90 सर्च आज भी गूगल पर ही की जा रही हैं.

बाकी सभी सर्च इंजन मिलकर भी सिर्फ करीब 10 प्रतिशत हिस्से में सिमटे हुए हैं. माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) का बिंग (Bing) हो या प्राइवेसी फोकस्ड डकडकगो (DuckDuckGo), कोई भी गूगल के आसपास भी नहीं दिखता.

टॉप सर्च इंजन्स में गूगल सबसे आगे

नवंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक गूगल 89.94 प्रतिशत शेयर के साथ पहले नंबर पर बना हुआ है. माइक्रोसॉफ्ट का बिंग 4.22 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है, लेकिन गूगल से दूरी बहुत ज्यादा है. रूस फोकस्ड यांडेक्स (Yandex) 2.18 प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर है. याहू (Yahoo) का शेयर घटकर 1.4 प्रतिशत रह गया है, जबकि डकडकगो 0.85 प्रतिशत पर सिमटा हुआ है. बाकी सर्च इंजन जैसे बायडू (Baidu) और इकोसिया (Ecosia) मिलकर करीब 1.41 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं.

क्यों गूगल का दबदबा अब भी कायम है

गूगल की सबसे बड़ी ताकत उसके सर्च रिजल्ट्स हैं. जेमिनी (Gemini) जैसे एआई इंटीग्रेशन के चलते सर्च ज्यादा फास्ट और एक्यूरेट हुआ है. इसके साथ ही यूजर हैबिट भी गूगल के पक्ष में है. भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में लोग सर्च करने को सीधे गूगल करना ही कहते हैं.

एंड्रॉयड (Android) इकोसिस्टम भी गूगल के लिए बड़ा एडवांटेज है. दुनिया भर में अरबों स्मार्टफोन में गूगल डिफॉल्ट सर्च इंजन के तौर पर मौजूद है. इसके अलावा गूगल ऐड्स से होने वाली भारी कमाई उसे टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में लगातार आगे रखती है, जहां बाकी प्लेयर्स पिछड़ जाते हैं.

चैलेंजर्स क्यों नहीं बन पा रहे खतरा

बिंग टेक्नोलॉजी के मामले में मजबूत है, लेकिन यूजर बेस और प्रमोशन के मामले में कमजोर पड़ जाता है. डकडकगो प्राइवेसी जरूर देता है, लेकिन फीचर्स और रिजल्ट डेप्थ में गूगल से पीछे है. याहू का नाम पुराना है, लेकिन उसका असर लगातार कम होता गया है.

क्या आने वाले समय में तस्वीर बदलेगी

एआई सर्च टूल्स जैसे चैटजीपीटी (ChatGPT) और परप्लेक्सिटी (Perplexity) तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. हालांकि फिलहाल ट्रेडिशनल सर्च मार्केट में गूगल की बादशाहत को कोई सीधी चुनौती नहीं मिल रही है. प्राइवेसी फोकस्ड सर्च इंजन जरूर धीरे धीरे ग्रो कर रहे हैं, लेकिन उनका स्केल अभी सीमित है. 2026 को लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि गूगल का मार्केट शेयर 85 से 90 प्रतिशत के बीच बना रह सकता है. वहीं एआई बेस्ड सर्च टूल्स कुल मिलाकर 10 से 15 प्रतिशत तक हिस्सा ले सकते हैं.

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Jai Thakur

जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें



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