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Pahadi Special Daal Recipe: अगर आप भी पहाड़ों में पारंपरिक स्वाद की तलाश में हैं, तो रैस की दाल से बेहतर कुछ नहीं. देखने में काली उड़द जैसी लगने वाली यह दाल न केवल प्रोटीन और फाइबर का खजाना है, बल्कि कड़ाके की ठंड में शरीर को अंदरूनी गर्माहट भी देती है. लोहे की कढ़ाई में पकने वाली इस दाल का सोंधापन और लहसुन के पत्तों का खास तड़का इसे आम दालों से बिल्कुल अलग बनाता है. जानिए क्यों पहाड़ी घरों में रैस की दाल को सेहत और स्वाद का सबसे बेहतरीन मेल माना जाता है.
बागेश्वर: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पारंपरिक खानपान आज भी लोगों की पहली पसंद है. यहां की दालें न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं. इन्हीं खास दालों में से एक रैस की दाल है. जो देखने में पहाड़ी उड़द जैसी लगती है, लेकिन इसका रंग पूरा काला होता है. अपने अनोखे स्वाद और पौष्टिक गुणों के कारण यह दाल स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है. रैस की दाल प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है. यह पाचन को बेहतर बनाने, शरीर को ऊर्जा देने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करती है. खासतौर पर ठंडे मौसम में इसे खाना शरीर को गर्माहट देता है, इसलिए पहाड़ों में इसे बड़े चाव से खाया जाता है.
ऐसे बनाएं टेस्टी पहाड़ी रैस की दाल
गृहिणी किरन पांडे ने लोकल 18 को बताया कि रैस की दाल बनाने के लिए सबसे पहले दाल को अच्छी तरह साफ कर लें, रातभर पानी में भिगो दें. इससे दाल जल्दी पकती है, स्वाद भी बेहतर आता है. अगले दिन दाल बनाने के लिए सबसे पहले एक लोहे की कढ़ाई या प्रेशर कुकर लें. अब तड़के की तैयारी करें. इसके लिए सरसों का तेल गर्म करें, उसमें लहसुन के पत्ते डालें. लहसुन का यह खास तड़का दाल के स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है. इसके बाद बारीक कटा प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें. फिर टमाटर डालकर अच्छी तरह पकाएं, जब तक मसाला तेल न छोड़ने लगे.
अब इसमें हल्दी, नमक, लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालकर मसाले को अच्छे से भून लें. जब मसाला तैयार हो जाए, तो इसमें भीगी हुई रैस की दाल डाल दें. पानी मिलाकर धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ दें. इसे करीब 25 से 30 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं, बीच-बीच में चलाते रहें. जब दाल अच्छी तरह गल जाए और गाढ़ी हो जाए, तो ऊपर से हरा धनिया डालकर सजाएं. चाहें तो अंत में घी का हल्का तड़का भी लगा सकते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
स्वाद के साथ सेहत का खजाना
रैस की दाल सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को ताकत देते हैं, लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं. यही वजह है कि पहाड़ों में यह दाल रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है. अगर आप भी कुछ अलग और हेल्दी ट्राई करना चाहते हैं, तो पहाड़ी रैस की दाल जरूर बनाएं. इसका देसी स्वाद आपके परिवार और मेहमानों को जरूर पसंद आएगा.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें