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गुलगुला उत्तर प्रदेश और ग्रामीण भारत की एक पारंपरिक और लोकप्रिय मिठाई है, जिसे गेहूं के आटे और गुड़ से तैयार किया जाता है. मिट्टी के चूल्हे पर बना यह मीठा पकवान न सिर्फ स्वाद में खास होता है, बल्कि गांवों में परंपरा और मेहमाननवाजी का भी हिस्सा माना जाता है. आसान विधि से तैयार होने वाला यह स्नैक आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.
ग्रहणी मंजू देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जब कोई मांगलिक कार्यक्रम होता है, तब महिलाओं को गुलगुला दिया जाता है. वहीं, गुलगुला बनाकर आप इसे करीब 10 से 15 दिन तक सुरक्षित रख सकते हैं, यह जल्दी खराब नहीं होता है. ऐसे में जब लोगों को भूख लगती है, तब ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी गुलगुला खाया जाता है. यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है और इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है.
वहीं कुछ लोगों को चीनी से बने गुलगुले पसंद नहीं होते हैं. गुड़ से बने गुलगुले शरीर को ऊर्जा देते हैं और आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं. अगर आप भी अपने घर में देसी स्वाद और पुराने दिनों की मिठास लाना चाहते हैं, तो एक बार यह आसान और स्वादिष्ट गुलगुला जरूर बनाकर देखें. एक बार खाएंगे तो आप बार-बार गुलगुला खाना पसंद करेंगे.
गुलगुला एक प्रकार का मीठा पकौड़ा होता है, जो गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी और पानी से तैयार घोल को तेल में तलकर बनाया जाता है. यह बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम व मीठा होता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे “मीठे पकौड़े” के नाम से भी जाना जाता है. इसे बनाने के लिए अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती और यह कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाता है. कुछ लोग इसे चाय के साथ भी खाना पसंद करते हैं.
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गुलगुला को दो प्रकार से बनाया जाता है, कुछ लोग इसे चीनी से तैयार करते हैं तो कुछ लोग देसी गुड़ से बनाते हैं. गुड़ से बने गुलगुले खासतौर पर ज्यादा पसंद किए जाते हैं क्योंकि गुड़ प्राकृतिक मिठास देता है और स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. ग्रामीण महिलाएं अक्सर इसमें सौंफ, इलायची या नारियल डालकर इसका स्वाद और भी बढ़ा देती हैं.
कढ़ाई में तेल या रिफाइंड को गर्म करें. जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब हाथ या चम्मच की मदद से छोटे-छोटे हिस्से तेल में डालें. गुलगुलों को धीमी आंच पर पलट-पलट कर सुनहरा भूरा होने तक तलें. फिर इन्हें निकालकर टिश्यू पेपर पर रखें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे दही या दूध के साथ भी खाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के ग्रामीण इलाकों में लोगों को गुलगुला बेहद पसंद होता है. गुलगुला एक पारंपरिक और बेहद लोकप्रिय मीठा पकवान है, जिसे गांवों में आज भी देसी अंदाज में मिट्टी के चूल्हे पर कढ़ाई में बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी खास हो जाता है. गांवों में गुलगुला सिर्फ एक पकवान नहीं बल्कि परंपरा का हिस्सा है. आज भी ग्रामीण इलाकों में शादी-ब्याह, पूजा-पाठ या मेहमानों के स्वागत में इसे खास तौर पर बनाया जाता है.
अगर आप भी घर पर गुलगुला बनाना चाहते हैं, तो आज हम आपको इसकी रेसिपी के बारे में बता रहे हैं. गुलगुला बनाने के लिए सबसे पहले एक कप गेहूं का आटा लें. इसके बाद 50 ग्राम गुड़ या चीनी लें. आवश्यकता अनुसार पानी और एक चम्मच इलायची पाउडर की जरूरत होती है. इसके बाद आप इसे सरसों के तेल या रिफाइंड में तैयार कर सकते हैं.
एक बर्तन में गेहूं का आटा लें और उसमें गुड़ का घोल धीरे-धीरे डालते हुए मिलाएं. ध्यान रखें कि घोल न ज्यादा पतला हो और न ज्यादा गाढ़ा, यह पकौड़े के बैटर जैसा होना चाहिए. इसमें सौंफ और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. चाहें तो इसमें थोड़ा सा कसा हुआ नारियल भी डाल सकते हैं. घोल को 10-15 मिनट के लिए ढककर रख दें, इससे गुलगुले और ज्यादा फूले हुए और नरम बनते हैं.