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गाजीपुर के नवापुरा घाट पर अहमदाबाद में सीखी कला से अभिषेक की झालमुड़ी लोगों को खूब पसंद आ रही है. उनके खास सीक्रेट मसाले और गुजराती तड़के वाली चटपटी झालमुड़ी के लिए रोज बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. ₹10–₹20 की प्लेट बेचकर वे रोज 100–200 प्लेट तक बेचते हैं और अच्छी बचत भी कर रहे हैं.

गाजीपुर. इन दिनों सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के झालमुड़ी प्रेम की चर्चा जोरों पर है, लेकिन क्या आपको पता है कि गाजीपुर के नवापुरा घाट पर भी अहमदाबादी तड़के वाली झालमुड़ी ने धूम मचा रखी है. गुजरात के अहमदाबाद से करीब 20 साल तक झालमुड़ी बनाने की कला सीखकर लौटे अभिषेक अब गाजीपुर के लोगों को अपनी उंगलियां चाटने पर मजबूर कर रहे हैं. अभिषेक ने अपनी कला को प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात के मशहूर सीजी रोड पर निखारा है. करीब दो दशकों तक वहां काम करने के बाद, वे अपने हुनर को गाजीपुर ले आए हैं. नवापुरा घाट पर सुबह 11 से रात 9 बजे तक लगने वाले उनके ठेले पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है.

क्या है अभिषेक का  सीक्रेट मसाला
अभिषेक की झालमुड़ी और सेवपुरी का सबसे बड़ा राज उनका खास मसाला है, इसमें गरम मसाला, धनिया पाउडर, दालचीनी और इलायची जैसे कई मसालों का एक अनूठा मिश्रण तैयार किया जाता है. झालमुड़ी में प्याज, टमाटर, मिर्च के तड़के के साथ ऊपर से डाले जाने वाले कुरकुरे पापड़ और नींबू का रस इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है. अभिषेक बताते हैं कि वे ₹10 और ₹20 की प्लेट बेचते हैं, लेकिन ₹20 वाली झालमुड़ी सबसे ज्यादा बिकती है. वे कहते हैं, लोग ₹20 खर्च करके भरपूर स्वाद पाना चाहते हैं. दिलचस्प बात यह है कि नवापुरा घाट पर घूमने आने वाली महिलाएं और लड़कियां इस तीखी-चटपटी झालमुड़ी की सबसे ज्यादा शौकीन हैं.

रोजाना ₹500 तक की बचत
अभिषेक रोजाना करीब 100 से 200 प्लेट झालमुड़ी बेच लेते हैं, जिससे उन्हें ₹400 से ₹500 तक की बचत हो जाती है. मेहनत और सादगी के साथ अभिषेक न केवल अपना रोजगार चला रहे हैं, बल्कि गाजीपुर के स्वाद में गुजराती तड़का भी लगा रहे हैं. जिसके कारण लोग इस झालमुड़ी के दिवाने बने बैठे है, जो यहां से एक बार खाकर जाता है, दोबारा जरूर आता है, क्योंकि यहां जैसा स्वाद और कहीं नहीं मिलता.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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