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सीधी जिले के आदिवासी इलाकों में गेहूं का दलिया और छाछ का देसी पेय ऊर्जा का बड़ा स्रोत है. दलिया से कार्बोहाइड्रेट व फाइबर मिलता है, जबकि छाछ शरीर को हाइड्रेशन और प्रोबायोटिक्स देती है. यह सस्ता पेय दिनभर फुर्ती बनाए रखता है और महंगे एनर्जी ड्रिंक्स की जरूरत को खत्म करता है.

सीधी. मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में सुबह का नाश्ता शहरों की तुलना में बिल्कुल अलग और देसी होता है. यहां के ग्रामीण आज भी पारंपरिक खानपान को अपनाए हुए हैं, जो सस्ता होने के साथ-साथ शरीर को भरपूर ऊर्जा भी देता है. खासकर गर्मी के समय में खेतों में मेहनत करने वाले लोगों के लिए यह नाश्ता किसी प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक से कम नहीं माना जाता. हम बात कर रहे हैं गेहूं के दलिया और छाछ (मट्ठा) के मिश्रण की, जो आज भी गांवों में सुबह की शुरुआत का अहम हिस्सा है.

रसिया प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. यहां के लोग सुबह-सुबह इस देसी पेय का सेवन कर दिनभर के काम के लिए खुद को तैयार करते हैं. इसे बनाने की प्रक्रिया भी बेहद सरल है. सबसे पहले गेहूं के दलिया को पानी में अच्छी तरह पकाया जाता है, जब तक वह पूरी तरह नरम न हो जाए. इसके बाद उसे ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है. सुबह के समय ठंडे दलिया को एक बर्तन में लेकर उसमें पर्याप्त मात्रा में छाछ मिलाई जाती है और अच्छे से घोलकर एक स्मूद पेय तैयार किया जाता है.

भूख और थकान नहीं होगी महसूस
स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें काला नमक या भुना जीरा पाउडर भी मिलाया जा सकता है. यह मिश्रण न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि शरीर को तुरंत और लंबे समय तक ऊर्जा देने में भी मदद करता है. खास बात यह है कि इसे पीने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती और शरीर में थकान भी महसूस नहीं होती.

पहले जब लोग खेतों में काम करने जाते थे, तो दिन की शुरुआत इसी पेय से करते थे. इसके बाद घंटों मेहनत करने के बावजूद शरीर में फुर्ती बनी रहती थी. यही कारण है कि आज भी कई किसान और मजदूर इस परंपरा को निभा रहे हैं. गर्मियों के मौसम में तो यह पेय और भी अधिक फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक देता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है.

भरोसेमंद और असरदार ड्रिंक
आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. आरपी परौहा का कहना है कि दलिया और मट्ठा का यह मिश्रण शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और लू से भी बचाव करता है. इसके अलावा यह वजन नियंत्रित रखने, पाचन सुधारने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में भी सहायक है. आज भले ही बाजार में तरह-तरह के एनर्जी ड्रिंक्स मौजूद हों, लेकिन गांवों का यह देसी पेय स्वास्थ्य के लिहाज से कहीं अधिक भरोसेमंद और असरदार साबित हो रहा है. यही वजह है कि बघेलखंड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी इस परंपरा को अपनाए हुए हैं और खुद को फिट व तंदुरुस्त बनाए रख रहे हैं.

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Mohd Majid

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