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Petha Making From Bhatua Pag: हमारे देश में हर क्षेत्र का खान – पान अलग अलग होता है. बिहार की भी अपनी अलग ही पहचान है. यहां की लिट्टी चोखा वाला स्वाद हर किसी ने अनुभव किया होगा, सत्तू का भी टेस्ट जरूर लिया होगा, लेकिन क्या सब्जी वाली मिठाई का स्वाद का टेस्ट किया है? नहीं तो चलिए फिर आज हम आपको बताते हैं कि कौन सी ऐसी सब्जी है, जिसकी मिठाई बनती है. वैसे तो परवल की भी मिठाई बनती है, लेकिन आज हम भतुआ पाग से बनी मिठाई की बात करेंगे.

पटना-जहानाबाद-गया फोर लेन पर गुजरने वाले यात्रियों के खाने पीने के लिए कई होटल, ढाबा और अन्य दुकानें खुली हुई हैं. उन्हीं दुकानों में से एक है – मुरब्बा मिठाई तैयार करने वाली दुकान. इस जगह से आप गुजरेंगे तो आपको यह समझ आ जाएगा कि यह दुकान बिहार की प्रसिद्ध मिठाई मुरब्बा बनाता है. यह दुकान पटना के मसौढ़ी में स्थित है. इसे यूपी साइड पेठा कहते हैं जो सफेद कद्दू से तैयार होता है. सफेद कद्दू को ही भतुआ कहा जाता है. यह केवल भाषा का फर्क है.

मुरब्बा की मिठाई, भतुआ पाग से बनती है. यह एक प्रकार की हरी सब्जी है, जिसका रायता भी तैयार होता है. हालांकि, बहुत ही कम लोग मिठाई बनने के बारे में जानते हैं. जिस दुकान में यह देसी मिठाई बनती है, वहां प्रतिदिन 2 क्विंटल मुरब्बा तैयार होता है. इसमें एक दर्जन कारीगर काम करते हैं. मुरब्बा बनाने से पहले भतुआ पाग की जरूरत पड़ती है, जिसे गांव-गांव ढूंढकर लाना पड़ता है. हर दिन की सबसे पहली प्रक्रिया यही रहती है. इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया होती है.

लोकल 18 से दुकान के मालिक सन्नी कुमार ने बताया कि भतुआ पाग की मिठाई बनाना बहुत ही चुनौती वाला काम है. 3 से 4 दिन में यह तैयार होता है. बहुत ही साफ सफाई का ध्यान रखना पड़ता है.

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बनाने की विधिः भतुआ को इकट्ठा करना, सही ढंग से छीलना, छीलने के बाद छेद किया जाता है, छेद के बाद अच्छे से धो लेना है, फिर चूने के पानी में भिगोना, फिर बहुत अच्छे से धोना, अब चीनी की चाशनी में पकाया जाता है, बहुत लंबी प्रक्रिया के बाद मुरब्बा तैयार होता है.

उन्होंने आगे बताया कि बाजार में 120 और 150 रुपए किलो तक यह मिठाई बिकती है. वहीं, यहां 100 रुपए में एक किलोग्राम तक मिल जाता है. कोई थोक भाव में ले जाता है तो 80 रुपए किलो तक पड़ता है. हालांकि, यह मिठाई सीजन में ही बनती है. क्योंकि जो सब्जी की जरूरत पड़ती है वो सालभर नहीं मिल पाती है तो हमलोगों को बंद रखना पड़ता है.



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