Natural Cooling Fruits: राजस्थान के जालौर और आसपास के रेगिस्तानी इलाकों में भीषण गर्मी के बीच एक ऐसा फल मिलता है, जो लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. पीलू, जो जाल के पेड़ पर लगता है, गर्मियों के सबसे कठिन दिनों में पकता है और जितनी तेज लू चलती है, उतना ही यह फल मीठा और रसदार हो जाता है. यही वजह है कि इसे रेगिस्तान का अंगूर और मेवा भी कहा जाता है. स्थानीय लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि शरीर को ठंडक देने और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए भी खाते हैं. आयुर्वेद के अनुसार पीलू शरीर के तीनों दोषों को संतुलित करने में मदद करता है और किडनी, लिवर व आंखों के लिए भी लाभकारी माना जाता है. छोटे आकार का यह फल, अपने भीतर बड़े फायदे छुपाए हुए है और रेगिस्तान में रहने वालों के लिए प्राकृतिक राहत का जरिया बना हुआ है. भीषण गर्मी में जब बाकी पेड़ सूखने लगते हैं, तब भी जाल का पेड़ हरा-भरा रहता है और पीलू के रूप में जीवन का सहारा देता है.