Last Updated:

दाल में चिकन मिलाकर बनने वाली पारसी डिश धनसाक स्वाद और इतिहास का अनोखा संगम है. करीब 1000 साल पुराना माना जाने वाला यह शाही व्यंजन पारसी समुदाय के साथ भारत पहुंचा और धीरे-धीरे भारतीय किचन से लेकर रेस्तरां तक लोकप्रिय हो गया. दाल, सब्जियां, मसालों और मांस से तैयार होने वाली यह डिश आज भी अपनी खास खुशबू और रिच स्वाद के लिए जानी जाती है.

Zoom

दाल में चिकन मिलाकर बनने वाली पारसी डिश.

धनसाक पारसी समुदाय का एक प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन है, जिसे दाल, सब्जियां, मसालों और चिकन या मटन के साथ तैयार किया जाता है. कई लोगों को यह सुनकर हैरानी होती है कि क्या दाल में मांस डाला जाता है, लेकिन धनसाक की यही सबसे खास पहचान है. यह सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि पारसी इतिहास, प्रवास और भारतीय स्वाद के मेल की कहानी भी है. आज यह भारत के बड़े शहरों के रेस्तरां में आसानी से मिल जाता है, लेकिन इसकी शुरुआत सदियों पुराने सफर से जुड़ी हुई है.

इतिहासकारों के अनुसार पारसी समुदाय लगभग 8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच फारस यानी आज के ईरान से भारत आया था. माना जाता है कि 715 ईस्वी से 936 ईस्वी के बीच कई पारसी परिवार धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए समुद्री रास्ते से भारत पहुंचे. वे सबसे पहले गुजरात के तटीय क्षेत्र संजान में बसे. अपने साथ वे भाषा, संस्कृति और खानपान की परंपराएं भी लाए. यहीं से फारसी शैली के भोजन में भारतीय मसालों, दालों और सब्जियों का असर जुड़ना शुरू हुआ. माना जाता है कि धनसाक का प्रारंभिक रूप गुजरात में ही विकसित हुआ, जहां स्थानीय सामग्री को पारसी पाक शैली के साथ मिलाया गया.

धनसाक शब्द को आमतौर पर दो भागों में समझा जाता है- ‘धन’ यानी अनाज या दाल और ‘साक’ यानी सब्जियां. पुराने समय में यह एक घरेलू भोजन था, जिसे परिवारों में खासकर रविवार को बनाया जाता था. धीरे-धीरे इसमें मटन और बाद में चिकन का इस्तेमाल बढ़ा. पारसी परिवारों में इसे ब्राउन राइस और कचूमर सलाद के साथ परोसने की परंपरा बनी, जो आज भी लोकप्रिय है.

यह डिश घरों से बाहर सबसे पहले गुजरात और फिर मुंबई पहुंची. 17वीं और 18वीं शताब्दी में जब पारसी व्यापारी और परिवार बड़ी संख्या में बॉम्बे (अब मुंबई) में बसने लगे, तब उनके खानपान का प्रभाव भी शहर में फैलने लगा. 19वीं शताब्दी तक मुंबई में पारसी कैफे और ईरानी रेस्तरां खुलने लगे, जहां पारंपरिक भोजन आम लोगों तक पहुंचा. इन्हीं रेस्तरां और खाने की दुकानों ने धनसाक को घर की रसोई से निकालकर शहर की लोकप्रिय डिश बना दिया. बाद में यह मुंबई से पुणे, सूरत, अहमदाबाद और फिर देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचा.

धनसाक बनाने के लिए अरहर, मसूर और मूंग जैसी दालों का मिश्रण लिया जाता है. इसके साथ कद्दू, बैंगन, आलू, पालक या मेथी जैसी सब्जियां डाली जाती हैं. चिकन या मटन को दाल और सब्जियों के साथ नमक, हल्दी और पानी में नरम होने तक पकाया जाता है. इसके बाद इसे मैश किया जाता है ताकि गाढ़ा टेक्सचर मिले. दूसरी ओर प्याज, अदरक-लहसुन, टमाटर और खास धनसाक मसाले को तेल या घी में भुना जाता है. फिर इसमें दाल और मांस का मिश्रण मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है.

About the Author

Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



Source link

Write A Comment