Last Updated:
Aam Ka Koocha Recipe: झारखंड के गांवों में गर्मी में कच्चे आम से बनने वाला एक खास व्यंजन खाया जाता है, जिसे आम का कूचा कहते हैं. इसे बिना कुकिंग के इतनी आसानी से बनाया जा सकता है कि बच्चे भी चटपटे स्वाद का इंतजाम खुद कर लें. ये शरीर को ठंडक भी देता है.
जमशेदपुर. गर्मियों का मौसम आते ही खान-पान की आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है, खासकर झारखंड के गांवों में. यहां की जीवनशैली प्रकृति से इतनी जुड़ी हुई है कि मौसम के साथ-साथ व्यंजन भी बदल जाते हैं. जब गर्मी के दिनों में दो-तीन अच्छी बारिश हो जाती है, तो पेड़ों पर लगे कच्चे आम धीरे-धीरे स्वाद में हल्के मीठे और रसीले होने लगते हैं. यही वह समय होता है जब गांवों में एक खास पारंपरिक व्यंजन बनाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘आम की कूचा’ कहा जाता है.
बच्चे बना लें, इतनी आसान रेसिपी
यह व्यंजन जितना स्वादिष्ट होता है, उतना ही आसान भी है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले ताजे कच्चे आम लिए जाते हैं. आम को ठंडे पानी से अच्छी तरह धोने के बाद उसका छिलका उतार लिया जाता है. फिर उसे पतले-पतले स्लाइस में काटा जाता है, ताकि हर टुकड़े में मसाले का स्वाद अच्छी तरह समा सके. इसके बाद इन स्लाइस पर नमक, लाल मिर्च पाउडर, भुना हुआ जीरा पाउडर और स्वादानुसार थोड़ी सी चीनी डाली जाती है. कुछ लोग इसमें काला नमक और थोड़ा सा सरसों का तेल भी मिलाते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
बिना गैस की कुकिंग
आम की कूचा का स्वाद खट्टा-मीठा और हल्का मसालेदार होता है, जो गर्मी के मौसम में बेहद ताजगी देता है. खास बात यह है कि यह व्यंजन बिना ज्यादा मेहनत और बिना गैस चूल्हे के भी तैयार हो जाता है, इसलिए गांवों में यह काफी लोकप्रिय है. खेतों में काम करने वाले लोग या घर के आंगन में बैठे परिवार के सदस्य इसे तुरंत बनाकर खा लेते हैं.
सेहत के लिए भी फायदेमंद
यह सिर्फ एक स्वादिष्ट डिश ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद है. कच्चे आम में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है, जो गर्मी में शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है. नमक और मसालों के साथ यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होता है. यही कारण है कि यह व्यंजन गर्मियों में ऊर्जा देने वाला एक प्राकृतिक विकल्प माना जाता है.
पारंपरिक खानपान का हिस्सा
खासकर गर्भवती महिलाओं (प्रेग्नेंट महिलाओं) के बीच इसकी लोकप्रियता ज्यादा होती है. खट्टा-मीठा स्वाद उनकी क्रेविंग को शांत करता है और उन्हें ताजगी का एहसास कराता है. वहीं बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हर उम्र के लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. आम का कूचा झारखंड की पारंपरिक संस्कृति और खान-पान का एक अहम हिस्सा है. यह न केवल स्वाद और सेहत का मेल है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे ग्रामीण जीवन में साधारण चीजों से भी बेहतरीन और यादगार व्यंजन तैयार किए जाते हैं.
About the Author
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें