जब भारत में गर्मी अपने पूरे जोर पर होती है, तो ज्यादातर घरों में ठंडी दही की कटोरी फिर से खाने की मेज पर आ जाती है. इस मौसम में दही का प्रयोग हर खाने की चीज के साथ किया जाता है, फिर चाहें वह पराठे हों या फिर खिचड़ी, बिरयानी हो या फिर नॉरमल चावल. दही हर डिश के साथ परफेक्ट बैठती है. दही केवल खाने के लिए ही नहीं बल्कि पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और स्किन ग्लो को बढ़ाने में मदद करता है. भारत और दुनिया भर में दही के कई रूप विकसित हो चुके हैं, जो हल्की, गाढ़ी, खट्टी और कभी-कभी सामान्य घर के दही से ज्यादा पौष्टिक भी होते हैं. अगर आप नॉरमल दही खाकर बोर हो गए हैं तो गर्मियों के मौसम में एक बार इन पांच तरह के दही को जरूर ट्राई करके देखें.

ग्रीक योगर्ट
ग्रीक योगर्ट पिछले कुछ सालों में भारतीय किचन में काफी लोकप्रिय हुआ है, लेकिन कई लोग इसे सामान्य दही समझ लेते हैं. फर्क छानने की प्रक्रिया में है. ग्रीक योगर्ट को कई बार छाना जाता है, जिससे अतिरिक्त पानी निकल जाता है और दही बहुत गाढ़ी हो जाती है.

गर्मी में इसकी खासियत यह है कि यह पेट भरता है लेकिन भारी नहीं लगता. ठंडी कटोरी में आम के टुकड़े, भीगे हुए चिया सीड्स या भुना हुआ मखाना डालकर इसे जल्दी ब्रेकफास्ट के तौर पर खाया जा सकता है. इसमें सामान्य दही से ज्यादा प्रोटीन होता है, इसलिए यह भूख को लंबे समय तक दूर रखता है. फिटनेस एक्सपर्ट और न्यूट्रिशनिस्ट इसे उन लोगों को सलाह देते हैं जो गर्मी में भूख कम या ज्यादा होने पर क्रेविंग्स को कंट्रोल करना चाहते हैं.

सबसे अच्छी बात यह है कि यह भारतीय स्वादों के साथ आसानी से एडजस्ट हो जाता है. काला नमक, भुना जीरा, पुदीना और खीरा डालकर इसे तुरंत ठंडा साइड डिश बनाया जा सकता है.

मिष्टी दोई
मिष्टी दोई सिर्फ मिठाई नहीं है. बंगाली घरों में यह एक भाव, परंपरा और यादों को एक मिट्टी के बर्तन में समेटे रखता है. मीठे दूध को फर्मेंट करके बनाई गई यह दही कैरेमल रंग की होती है और इसका स्वाद मसालेदार खाने के बाद बहुत सुकून देता है. इस दही के लिए मिट्टी के बर्तन का इस्तेमाल भी यूं ही नहीं होता. मिट्टी धीरे-धीरे अतिरिक्त नमी सोख लेती है, जिससे दही गाढ़ी और स्वाभाविक रूप से ठंडी हो जाती है. गर्मी के दिनों में खासकर पूर्वी भारत में जहां उमस बहुत ज्यादा होती है, ठंडी मिष्टी दोई बहुत ज्यादा पसंद की जाती है.

केफिर
केफिर नाम सुनने में नया लग सकता है, लेकिन कई न्यूट्रिशन एक्सपर्ट इसे दही का ज्यादा फर्मेंटेड भाई मानते हैं. पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में लोकप्रिय केफिर, केफिर ग्रेन्स से बनता है, जो दूध को फर्मेंट करके हल्का फिजी, खट्टा और प्रोबायोटिक्स से भरपूर ड्रिंक बना देता है. गर्मी में केफिर की खासियत इसकी हल्कापन है.

गाढ़ी दही की तरह नहीं, केफिर एक ताजगी भरी ड्रिंक जैसा लगता है. कुछ लोग इसकी बनावट को पतली छाछ से तुलना करते हैं, लेकिन स्वाद थोड़ा तेज होता है. भारत में केफिर अभी भी कम ही मिलता है, लेकिन शहरी घरों में लोग इसके घरेलू वर्जन ट्राई कर रहे हैं. इसमें पुदीना, बर्फ या शहद मिलाकर भारतीय स्वाद के हिसाब से बनाया जा सकता है.

स्कायर
स्कायर, जिसे स्कीर भी कहा जाता है, आइसलैंड से आता है और देखने में ग्रीक योगर्ट जैसा लगता है. लेकिन इसका स्वाद हल्का, स्मूद और थोड़ा कम खट्टा होता है. पहली बार खाने वालों को हैरानी होती है कि यह गाढ़ा और क्रीमी होने के बावजूद कितना हल्का लगता है. गर्मियों में जब भारी खाना अच्छा नहीं लगता, तब यह बहुत अच्छा विकल्प है. स्कायर में प्रोटीन ज्यादा और फैट कम होता है, किस्म के हिसाब से. यह भारतीय चीजों के साथ भी अच्छा लगता है. कटे हुए चीकू, अनार, केसर या पिस्ता इसमें आसानी से मिल जाते हैं.

पैकेज्ड मिठाइयों में अक्सर बहुत चीनी होती है, लेकिन साधारण स्कायर में ताजे फल डालकर इसे हेल्दी स्नैक बनाया जा सकता है. यह चुपचाप बदलती भारतीय खाने की आदतों को भी दिखाता है. युवा लोग अब दुनिया भर की पारंपरिक फर्मेंटेशन विधियों में रुचि दिखा रहे हैं और उन्हें अपने स्वाद के हिसाब से ढाल रहे हैं.

हंग दही
हंग दही इस लिस्ट में सबसे जाना-पहचाना नाम है, लेकिन इसे उतना महत्व नहीं मिलता जितना मिलना चाहिए. सामान्य दही को मलमल के कपड़े में छानकर बनाई गई हंग दही गाढ़ी, क्रीमी और बहुपयोगी होती है. कई भारतीय घरों में इसे कबाब या सैंडविच स्प्रेड के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे अलग तरह की दही के रूप में नहीं देखा जाता. गर्मी में यह भारी मेयोनेज वाले डिप्स और स्प्रेड्स की जगह ले सकती है.

धनिया, लहसुन, काली मिर्च और खीरा मिलाकर हंग दही का ठंडा डिप स्नैक्स के लिए तुरंत तैयार हो जाता है. यह स्वाद को भी बहुत अच्छे से सोख लेती है. पुदीना से लेकर पेरी-पेरी मसाला तक, हंग दही भारतीय मसालों के साथ आसानी से एडजस्ट हो जाती है.



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