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Panchkuta Sabji Recipe: राजस्थान की पारंपरिक पंचकुटा सब्जी गर्मियों में लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. केर, सांगरी, कुमटिया और गुंदा जैसी सूखी वनस्पतियों से बनने वाली यह डिश लंबे समय तक खराब नहीं होती और स्वाद में भी बेहद खास मानी जाती है. जालोर सहित पश्चिमी राजस्थान में शादी-ब्याह और खास आयोजनों में इसकी खास मांग रहती है. गृहिणी प्रीति सैन ने बताया कि यह केवल एक सब्जी नहीं बल्कि राजस्थान की संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है. कम पानी में बनने वाली यह डिश रेगिस्तानी जीवनशैली और स्थानीय खानपान की पहचान भी मानी जाती है.

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जालोर. राजस्थान की पारंपरिक खानपान संस्कृति में पंचकुटा सब्जी का खास महत्व है. खासकर गर्मियों के मौसम में जब हरी सब्जियों की कमी हो जाती है, तब यह पारंपरिक डिश लोगों की पहली पसंद बन जाती है. केर, सांगरी, कुमटिया, गुंदा और अन्य सूखी वनस्पतियों से तैयार होने वाली यह सब्जी स्वाद के साथ-साथ लंबे समय तक सुरक्षित रहने के कारण भी बेहद लोकप्रिय मानी जाती है. जालोर सहित पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में इसे बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है.

पंचकुटा केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा है. शादी-ब्याह, त्योहार या किसी खास अवसर पर यह डिश थाली की शान मानी जाती है. रेगिस्तानी इलाकों में कम पानी और सीमित संसाधनों के बीच विकसित हुई यह सब्जी स्थानीय खानपान की समझ और परंपरा को भी दर्शाती है. कम पानी में तैयार होने वाली यह डिश लंबे समय तक खराब नहीं होती, इसलिए इसे गर्मियों में खास तौर पर बनाया जाता है.

गर्मियों में बनाई जाती है पंचकुटा सब्जी 

गृहिणी प्रीति सैन ने बताया कि उनके यहां गर्मियों में पंचकुटा सब्जी जरूर बनाई जाती है. उन्होंने कहा कि यह सब्जी जल्दी खराब नहीं होती और खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है. खासकर शादी-ब्याह और पारिवारिक आयोजनों में इसकी डिमांड हमेशा बनी रहती है. उन्होंने बताया कि यह केवल भोजन नहीं बल्कि राजस्थान की परंपरा और संस्कृति से जुड़ी पहचान है.

ऐसे घर पर बना सकते हैं पंचकुटा सब्जी

प्रीति सैन ने पंचकुटा सब्जी बनाने की विधि भी साझा की. उन्होंने बताया कि सबसे पहले केर, सांगरी, कुमटिया और गुंदा जैसी सूखी वनस्पतियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोया जाता है. इसके बाद इन्हें उबालकर नरम किया जाता है. उबालने के बाद दोबारा साफ पानी से धोकर इनका पूरा पानी सुखा लिया जाता है ताकि सब्जी में बिल्कुल नमी न रहे. इसके बाद कढ़ाही में सरसों का तेल गर्म कर उसमें हींग का तड़का लगाया जाता है.

फिर हल्दी डालकर सभी उबली हुई वनस्पतियों को अच्छी तरह फ्राई किया जाता है. इसमें लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है. खास बात यह है कि इस सब्जी में पानी बिल्कुल नहीं डाला जाता. अंत में अमचूर पाउडर डालकर इसे हल्का खट्टा स्वाद दिया जाता है, जो इसके स्वाद को और भी खास बना देता है.

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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें



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