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Khajuri fruit benefits: छतरपुर जिले में गर्मी मौसम में देसी खजूर (खजूर) यानी छिंद नाम का जंगली पेड़ पाया जाता है. इसे क्षेत्रीय भाषा में खजुरिया या खजीर भी कहा जाता है. ये पेड़ गर्मी सीजन में खास बन जाता है. क्योंकि गर्मी मौसम में ही इसमें फल आते हैं जिसे हर कोई खाना पसंद करता है. हालांकि, ये फल 1 महीने तक ही खाने को मिलता है. 

Khajuri Fal. छतरपुर जिले में गर्मी मौसम में एक ऐसा भी जंगली पेड़ पाया जाता है जो गर्मी सीजन में खास बन जाता है. क्योंकि गर्मी मौसम में ही इसमें फल आते हैं जिसे हर कोई खाना पसंद करता है. हालांकि, ये फल 1 महीने तक ही खाने को मिलता है. दरअसल, हम बात कर रहे देसी खजूर यानी छिंद पेड़ की जो जिले में आज भी जंगली इलाकों में देखने को मिल जाते हैं.

जंगल में बकरी चराने वाले देवीदीन प्रजापति लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि छतरपुर में मिलने वाला यह एक जंगली फल होता है. इसे जिले में खजरी या खजूरी फल के नाम से जाना जाता है. ये पेड़ नदी नालों के किनारे ज्यादातर पाए जाते हैं. खेत किनारे में भी देखने को मिल जाते हैं.

देवी दीन बताते हैं कि मार्च-अप्रैल महीने में इसमें फल आने शुरू हो जाते हैं. जब पहली बारिश होती है तो ये फल पकने शुरू हो जाते हैं. जब ये पककर पूरी तरह से लाल हो जाती हैं तो अपने आप ही पेड़ों से झड़ने लगती हैं. पकने के बाद ये गीली रहती हैं. इन्हें खाने में बड़ा मजा आता है.‌ लोग इसके फलों को बीनकर घरों में रख लेते हैं और फिर खाते रहते हैं. इसे गरीबों की खजूर भी कहते हैं.

देवी दीन बताते हैं कि अभी मई का महीना चल रहा है इसलिए अभी इन्हें पकने में समय है क्योंकि पहली बारिश के बाद ही ये पकना शुरू होती हैं. जून से पकना शुरू हो जाती हैं और जुलाई तक खाने को मिलती हैं. इस फल को जानवर भी खाना पसंद करते हैं. जंगली जानवर सियार और नीलगाय भी इसे खाना पसंद करते हैं. भेड़-बकरी भी खाती हैं.

खाने में होता है खजूर जैसा मीठा
देवी दीन बताते हैं कि इस खजूरी का स्वाद भी खजूर फल यानी छुहारे जैसा ही मीठा होता है. हालांकि , ये साइज में छोटा होता है.‌ इसे बच्चों से लेकर बूढ़े तक खाना पसंद करते हैं. हालांकि, ज्यादा मात्रा में सेवन करने से दिक्कत हो सकती है.

फल की तासीर गर्म होती है
देवी दीन बताते हैं कि गर्मी भर यह फल पेड़ों में लगे होते हैं और लगभग 4 महीने तक गर्मी सहते हैं. इसलिए इस जंगली फल की तासीर गर्म होती है. लेकिन बरसात सीजन में तापमान कम हो जाता है तो ये फल शरीर के लिए फायदेमंद होता है.

बाजार में कम ही दिखता
देवी दीन बताते हैं कि यह जंगली फल सिर्फ 30 दिनों तक ही बाजार में देखने को मिलता है. हालांकि इसके पेड़ हार-जंगलों में लगे होते हैं इसलिए बाजारों में भी कम ही दिखाई देता है

बरसात मौसम में पकते हैं फल
देवी दीन बताते हैं कि जैसे जामुन के पेड़ में फल गर्मी भर लगे रहते हैं और बरसात आने पर पकना शुरू होते हैं ऐसे ही यह जंगली फल भी बरसात के मौसम में पकते हैं.

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Mohd Majid

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