Last Updated:

आलू और कटहल के कोफ्ते तो आपने कई बार खाए होंगे, लेकिन मिथिलांचल में कच्चे केले का कोफ्ता भी काफी पसंद किया जाता है. उबले हुए कच्चे केले से पहले पकौड़े तैयार किए जाते हैं, फिर उन्हें मसालेदार प्याज वाली ग्रेवी में पकाया जाता है. इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि एक बार खाने के बाद बार-बार खाने का मन करता है.

मधुबनी: आपने आलू और कटहल के कोफ्ते तो कई बार खाए होंगे, लेकिन क्या कभी कच्चे केले का कोफ्ता चखा है? मिथिलांचल में बनने वाली यह पारंपरिक डिश स्वाद में बेहद लाजवाब होती है. मसालेदार ग्रेवी और केले के कुरकुरे कोफ्ते का स्वाद ऐसा होता है कि इसे खाने के बाद बार-बार बनाने का मन करता है.

मिथिलांचल अपने देसी और चटपटे व्यंजनों के लिए काफी मशहूर है. यहां हरी सब्जियों और स्थानीय सामग्री से कई तरह के स्वादिष्ट पकवान तैयार किए जाते हैं. कच्चे केले का कोफ्ता भी उन्हीं खास पारंपरिक व्यंजनों में से एक है, जिसे लोग चावल और रोटी दोनों के साथ बड़े स्वाद से खाते हैं.

गृहिणी अंजू बताती हैं कि केले का कोफ्ता बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे केले को छिलके समेत कुकर में उबाल लिया जाता है. उबलने के बाद उसका छिलका हटाकर केले को अच्छी तरह मैश किया जाता है. इसके बाद उसमें बेसन, हरी मिर्च, नमक और मसाले मिलाकर छोटे-छोटे पकौड़े तैयार किए जाते हैं और उन्हें तेल में डीप फ्राई कर लिया जाता है.

इसके बाद स्वादिष्ट ग्रेवी तैयार की जाती है. इसके लिए प्याज, हरी मिर्च, लहसुन, अदरक और टमाटर का पेस्ट बनाया जाता है. फिर कढ़ाई में तेल गर्म कर उसमें जीरा और सूखी मिर्च का तड़का लगाया जाता है. इसके बाद पिसा हुआ मसाला डालकर अच्छी तरह भुना जाता है. फिर हल्दी, धनिया, मिर्च पाउडर और गरम मसाला डालकर ग्रेवी तैयार की जाती है. जब ग्रेवी में अच्छी तरह उबाल आने लगता है, तब उसमें केले के तले हुए कोफ्ते डाल दिए जाते हैं.

अंजू बताती हैं कि यह सब्जी चावल, सलाद और घी लगी रोटी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है. उन्होंने यह भी बताया कि कच्चे केले को उबालने के बाद उसके छिलके को फेंका नहीं जाता. मिथिलांचल में लोग उसके छिलके को सिलबट्टे पर हरी मिर्च के साथ पीसकर स्वादिष्ट चटनी भी बनाते हैं. यह चटनी कई दिनों तक फ्रिज में सुरक्षित रखी जा सकती है और खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है.



Source link

Write A Comment