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झारखंड का पारंपरिक चौलाई साग दूर करेगा थकान; भात के साथ जमता है इसका असली रंग

 

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जमशेदपुर: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक ‘चौलाई साग’ बेहद चाव से खाया जाता है. स्वाद के साथ-साथ सेहत से भरपूर यह साग गर्मी और बरसात के मौसम में खेतों में प्रचुर मात्रा में मिलता है। इसे बनाना बेहद आसान है. सरसों तेल में सूखी लाल मिर्च और प्याज का तड़का लगाकर कड़ाही में बारीक कटे चौलाई साग को स्वादानुसार नमक के साथ धीमी आंच पर 15-20 मिनट पकाया जाता है. दोपहर के भोजन में गर्मागर्म भात (चावल) के साथ खाया जाने वाला यह व्यंजन पूरे दिन की थकान मिटा देता है. अब शहरों में भी लोग इसके देसी स्वाद को पसंद कर रहे हैं.

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