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Mango Recipes: कच्चे आम से बनने वाली आम झोल, आमटी, आम की लौंजी और आम का खट्टा जैसी पारंपरिक रेसिपीज कभी भारतीय रसोई का अहम हिस्सा थीं. क्षेत्रीय संस्कृति से जुड़ी ये डिशेज आज भी कुछ घरों में बनती हैं, लेकिन नई पीढ़ी के बीच इनकी लोकप्रियता पहले जैसी नहीं रही.
आम की अनोखी रेसिपी.
गर्मी आते ही बाजारों में कच्चे आम की भरमार दिखाई देने लगती है. आज ज्यादातर लोग इससे अचार, चटनी या पना बनाते हैं, लेकिन भारत के अलग-अलग हिस्सों में कच्चे आम से बनने वाली कई पारंपरिक रेसिपीज ऐसी भी हैं जो समय के साथ धीरे-धीरे लोगों की रसोई से गायब हो गईं. आइए जानते हैं ऐसी 4 दिलचस्प और स्वाद से भरपूर देसी रेसिपीज के बारे में…
1. आम झोल (बंगाल)
पश्चिम बंगाल के कई घरों में गर्मियों के दौरान कच्चे आम से आम झोल बनाया जाता था. यह हल्का, खट्टा और ताजगी देने वाला व्यंजन होता है, जिसे खाने के अंत में परोसा जाता था. इसमें कच्चे आम को मसालों और पानी के साथ पकाया जाता है. गर्म मौसम में इसे शरीर को ठंडक देने वाला भोजन माना जाता था. आज भी कुछ पारंपरिक बंगाली परिवारों में यह रेसिपी बनाई जाती है, लेकिन नई पीढ़ी के बीच इसकी पहचान कम हो गई है.
2. आमटी (महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र की पारंपरिक रसोई में कच्चे आम से बनने वाली आमटी कभी काफी लोकप्रिय थी. दाल और कच्चे आम के मेल से तैयार होने वाली यह डिश खट्टे और हल्के मीठे स्वाद का संतुलन पेश करती है. चावल के साथ इसका स्वाद खास माना जाता है. आधुनिक रेसिपीज के बढ़ते चलन में यह पारंपरिक व्यंजन अब पहले जितना आम नहीं रह गया है.
3. कच्चे आम की लौंजी (राजस्थान और उत्तर भारत)
आम की लौंजी राजस्थान और उत्तर भारत में खाई जाती थी. आज भी कुछ घरों में बनने वाली यह रेसिपी पहले गर्मियों की पहचान मानी जाती थी. कच्चे आम, गुड़ और मसालों से तैयार होने वाली लौंजी का स्वाद खट्टा, मीठा और मसालेदार होता है. इसे रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ खाया जाता था. लंबे समय तक सेफ रहने की वजह से यह यात्रा के दौरान भी पसंद की जाती थी.
4. आम का खट्टा (हिमाचल प्रदेश)
हिमाचली भोजन में कच्चे आम से बनने वाला ‘आम का खट्टा’ एक खास स्थान रखता है. इसमें कच्चे आम को मसालों और गुड़ के साथ पकाकर गाढ़ा टेस्टी डिश तैयार किया जाता है. पारंपरिक धाम (भोज) में इसे विशेष रूप से परोसा जाता था. हालांकि शहरी जीवनशैली में यह रेसिपी अब कम देखने को मिलती है.
हर रेसिपी में छिपी है एक कहानी
इन रेसिपीज की खासियत सिर्फ उनका स्वाद नहीं है, बल्कि वे अपने-अपने क्षेत्र की संस्कृति और मौसम से भी जुड़ी हैं. जब रेफ्रिजरेटर और पैकेटबंद खाद्य पदार्थ आम नहीं थे, तब लोग स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल करके ऐसे व्यंजन तैयार करते थे जो स्वाद के साथ मौसम की जरूरतों को भी पूरा करते थे.
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विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें