पूर्वी चंपारण का तुरकौलिया अपनी खास मुरकी मिठाई के लिए पूरे बिहार में प्रसिद्ध है. यह मिठाई अपने अनोखे स्वाद और खास बनाने की विधि के कारण लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. खास बात यह है कि यह मुरकी मिठाई मुख्य रूप से तुरकौलिया चौक पर ही मिलती है.इस मिठाई का इतिहास अंग्रेजों के दौर से जुड़ा हुआ है. मुरकी मिठाई बनाने की शुरुआत स्वर्गीय गोपाल चौधरी ने की थी. उनके पुत्र उमेश पटेल (भुआल) बताते हैं कि अंग्रेज अफसर इस मिठाई के इतने शौकीन थे कि वे इसे अक्सर तुरकौलिया कोठी में मंगवाते थे.उमेश पटेल के अनुसार, मुरकी मिठाई का विचार खुरमा मिठाई से आया था. इसे छेना का खुरमा भी कहा जाता है, लेकिन इसका आकार खुरमा से बड़ा होता है. इस मिठाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे केवल चीनी के पाग में तैयार किया जाता है. इसमें किसी भी प्रकार के तेल का इस्तेमाल नहीं होता.आज मुरकी मिठाई की कीमत करीब 500 रुपये प्रति किलो है. इसके बावजूद इसकी मांग लगातार बनी रहती है. यह मिठाई सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि देश और विदेश तक भेजी जाती है. जो लोग एक बार इसका स्वाद चख लेते हैं, वे दोबारा इसे खरीदने जरूर आते हैं.उमेश पटेल बताते हैं कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी राजगीर में आयोजित एक कार्यक्रम में मुरकी मिठाई का विशेष स्टॉल लगवाया था. यही वजह है कि चंपारण की यह मिठाई आज अपनी अलग पहचान बना चुकी है और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है.