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घर की रसोई में रखी कई चीजें कुछ समय बाद खराब हो जाती हैं, लेकिन शहद ऐसा फूड है जो लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है. आखिर ऐसा क्या है शहद में, जिसकी वजह से यह जल्दी खराब नहीं होता? जानें इसके पीछे की दिलचस्प साइंस.
मधुमक्खियां फूलों से रस यानी नेक्टर इकट्ठा करती हैं.
शहद को दुनिया के सबसे पुराने और प्राकृतिक फूड्स में से एक माना जाता है. हजारों सालों से लोग इसका इस्तेमाल खाने, औषधीय कामों और घरेलू नुस्खों में करते आए हैं. लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शहद लंबे समय तक खराब नहीं होता. आम तौर पर दूध, फल, सब्जियां या दूसरी खाने की चीजें कुछ समय बाद खराब होने लगती हैं, लेकिन सही तरीके से रखा गया शहद सालों तक सुरक्षित रह सकता है. इसके पीछे कई प्राकृतिक कारण होते हैं.
शहद के लंबे समय तक खराब न होने की सबसे बड़ी वजह इसमें मौजूद कम नमी होती है. शहद में पानी की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे बैक्टीरिया और दूसरे माइक्रोऑर्गेनिज्म के लिए बढ़ना मुश्किल हो जाता है. ज्यादातर बैक्टीरिया को बढ़ने के लिए नमी की जरूरत होती है, लेकिन शहद का गाढ़ापन और कम पानी इसे खराब होने से बचाने में मदद करता है.
प्राकृतिक रूप से एसिडिक होता है शहद
शहद का पीएच लेवल कम होता है यानी यह हल्का एसिडिक होता है. इसकी वजह से कई तरह के बैक्टीरिया इसमें आसानी से पनप नहीं पाते. यही प्राकृतिक गुण शहद को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करते हैं.
मधुमक्खियां कैसे बनाती हैं शहद?
शहद बनने की प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प होती है. मधुमक्खियां फूलों से रस यानी नेक्टर इकट्ठा करती हैं और उसे अपने छत्ते तक लाती हैं. इसके बाद एंजाइम्स की मदद से इस रस में बदलाव होता है और धीरे-धीरे यह शहद में बदल जाता है. मधुमक्खियों की मेहनत और प्राकृतिक प्रक्रिया की वजह से शहद में ऐसे गुण आ जाते हैं जो इसे लंबे समय तक टिकाने में मदद करते हैं.
क्या शहद कभी खराब नहीं होता?
यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि शहद कभी खराब नहीं होता. अगर शहद में पानी मिल जाए या उसे गीले चम्मच से बार-बार निकाला जाए तो उसमें नमी बढ़ सकती है और खराब होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए शहद को हमेशा सूखी और साफ जगह पर रखना चाहिए. कंटेनर को अच्छी तरह बंद करके रखना भी जरूरी होता है.
शहद का रंग और टेक्सचर क्यों बदलता है?
कई बार पुराने शहद का रंग गहरा हो जाता है या वह जमने लगता है. इसका मतलब यह नहीं कि शहद खराब हो गया है. तापमान में बदलाव की वजह से शहद में क्रिस्टल बनने लगते हैं. इसे हल्का गर्म करने पर फिर से सामान्य किया जा सकता है.
प्राचीन समय में भी होता था इस्तेमाल
शहद का इस्तेमाल सिर्फ खाने के लिए नहीं बल्कि पुराने समय से कई संस्कृतियों में अलग-अलग तरीकों से किया जाता रहा है. प्राचीन मिस्र जैसी सभ्यताओं में भी शहद के इस्तेमाल के प्रमाण मिले हैं. यही वजह है कि शहद को प्रकृति का एक अनोखा फूड माना जाता है. शहद का लंबे समय तक सुरक्षित रहना सिर्फ कोई चमत्कार नहीं बल्कि इसकी प्राकृतिक बनावट और साइंस का नतीजा है.
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विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें