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Mau Famous Tomato Aloo Tikki: अगर आप समोसा, कचौड़ी और आम आलू टिक्की खाकर बोर हो चुके हैं, तो उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की यह अनोखी टमाटर वाली आलू टिकिया आपका दिल जीत लेगी. हाइवे किनारे बड़ागांव के पास पिछले 50 सालों से मिल रही इस टिकिया का स्वाद इतना लाजवाब है कि यहां से गुजरने वाली बसें और बड़े वाहन भी रुक जाते हैं. सिर्फ 9 रुपये में मिलने वाली इस खास टिकिया को बनाने का तरीका बेहद अलग है, जिसमें उबले आलू के साथ साबुत टमाटर और बेसन का एक मेल देखने को मिलता है. आइए जानते हैं मऊ की इस मशहूर दुकान और इसकी खास रेसिपी के बारे में.

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में स्थित मऊ जनपद में एक बेहद अलग प्रकार की आलू की टिकिया बनाई जाती है, जिसे खाने के लिए लोग दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं. मुख्य सड़क पर दुकान होने की वजह से यहां से गुजरने वाले हर राहगीर या बड़े वाहनों के पहिए अपने आप रुक जाते हैं. इस टिकिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आलू, टमाटर और कई अन्य खास चीजें डालकर इसे एक अलग रेसिपी से तैयार किया जाता है. इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि जो व्यक्ति एक बार इसे खा लेता है, वह यहां बार-बार आने पर मजबूर हो जाता है.

मऊ जनपद के बड़ागांव के पास मुख्य सड़क के किनारे ‘संतोष टिकिया भंडार’ पर यह खास टिकिया बनाई जाती है, जो पूरे इलाके में काफी मशहूर है. यही वजह है कि इस रास्ते से गुजरने वाला हर कोई इस स्वाद का आनंद लेने के लिए यहां जरूर रुकता है. इस टिकिया को बनाने के लिए सबसे पहले आलू को अच्छी तरह उबाला जाता है और फिर उसे बाहर निकालकर उसमें कई तरह के भुने हुए मसाले डालकर बेहद चटपटा बनाया जाता है.

अक्सर देखा जाता है कि आम दुकानों पर लोग टिकिया बनाते समय आलू के मसाले को कड़ाही में तेल के साथ भून देते हैं, जिससे उसका असली स्वाद दब जाता है. लेकिन यहां आलू को सिर्फ उबाला जाता है और फिर उसमें कच्चे तौर पर ही कई प्रकार के सीक्रेट मसाले मिलाकर चटपटा बेस तैयार किया जाता है. आलू के मसाले को न भूनने की यही अनोखी तकनीक इस टिकिया के स्वाद को बाकी जगहों से बिल्कुल अलग और कई गुना बेहतर बना देती है.

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टिकिया तैयार करते समय उबले और मसालेदार चटपटे आलू के मिश्रण के दोनों तरफ टमाटर के बारीक कटे टुकड़ों को अच्छे से चिपका दिया जाता है. इसके बाद इस पूरे कॉम्बिनेशन को बेसन के गाढ़े घोल में अच्छी तरह डुबोया जाता है और फिर उसे खौलते हुए गर्म तेल की कड़ाही में डालकर डीप फ्राई किया जाता है. टमाटर, बेसन और आलू का यही अनूठा मेल इसे बेहद स्वादिष्ट बनाता है.

इस खास टिकिया को गर्म तेल की कड़ाही में तब तक अच्छे से फ्राई किया जाता है, जब तक कि वह पूरी तरह क्रिस्पी और गहरे लाल रंग की न हो जाए. जब टिकिया एकदम करकरी हो जाती है, तो उसे तेल से बाहर निकाल लिया जाता है और फिर गर्मागर्म ही ग्राहकों को परोसा जाता है. यह टिकिया दिखने में इतनी लाजवाब होती है कि इसे देखते ही मुंह में पानी आ जाता है.

मऊ में मिलने वाली इस अनोखी टिकिया को खाने के लिए लोग बहुत दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं. चूंकि यह टिकिया बनाने का तरीका और इसका स्वाद बाकी सभी जगहों से एकदम जुदा है, इसलिए इसे खाने के लिए हमेशा भीड़ जुटी रहती है. हाईवे के किनारे दुकान होने के कारण यहां से गुजरने वाली बसों के यात्री और बड़े वाहनों के लोग न सिर्फ इसे यहां चाव से खाते हैं, बल्कि अपने घर के लिए भी पैक कराकर ले जाते हैं.

अगर इस टिकिया के दीवानों की बात करें, तो यहां सिर्फ मऊ के ही नहीं, बल्कि आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया और बनारस जैसे तमाम बड़े शहरों के मुसाफिर रुकते हैं और टिकिया पैक कराकर अपनी यात्रा पर आगे बढ़ते हैं. पूरे मऊ जिले में ऐसी टिकिया कहीं और नहीं मिलती. पिछले लगभग 50 वर्षों से चल रही यह दुकान आज भी अपने उसी पुराने पारंपरिक स्वाद के लिए मशहूर है, जिसके कारण आधी सदी बाद भी इसका जायका रत्ती भर नहीं बदला है.

मऊ जनपद की इस मशहूर टिकिया की कीमत की बात करें, तो यह मात्र ₹9 प्रति पीस के हिसाब से ग्राहकों को दी जाती है. इस दुकान की एक और खास बात यह है कि यहां आपको हमेशा एकदम ताजा और गर्मागर्म टिकिया ही मिलेगी. यहां कारीगर उतनी ही टिकिया कड़ाही में तलते हैं, जितने का ऑर्डर होता है. इसी वजह से यहां स्वाद के शौकीनों को अपनी बारी के लिए कुछ देर तक इंतजार भी करना पड़ता है.

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