नई दिल्ली. बॉलीवुड में मल्टी-स्टारर कॉमेडी फिल्मों का एक अनोखा और कल्ट इतिहास रहा है. जब भी स्क्रीन पर बड़ी कास्ट के कैरेक्टर आते हैं, तो दर्शकों को ‘अंदाज अपना अपना’ या ‘हेरा फेरी’ के जमाने की याद आ जाती है. इसी लेगेसी को आगे बढ़ाते हुए, स्टार स्टूडियोज 18, सीता फिल्म्स और राकेश डांग के साथ मिलकर बनी ‘वेलकम टू द जंगल’ थिएटर में रिलीज हुई है. डायरेक्टर अहमद खान ने साबित कर दिया है कि कास्ट की परफेक्ट कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीनप्ले की पकड़ से, ढाई घंटे से ज्यादा का रनटाइम भी पलक झपकते ही खत्म हो सकता है. फिल्म बहुत ज्यादा सीरियस होने की कोशिश नहीं करती. बल्कि, इसका बोल्ड और सेल्फ-अवेयर नेचर इसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है.

कहानी
फिल्म का प्लॉट अनोखा, अनोखा और क्रिएटिवली इनोवेटिव है. कहानी एक अमीर और चालाक पॉलिटिशियन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे अपनी बड़ी और अनडिस्क्लोज्ड दौलत को सरकारी टैक्स रेड से बचाना है. इस बड़ी रकम को सफेद करने के लिए, वह एक अजीब प्लान बनाता है. वह फिल्म बनाने की आड़ में अपनी दौलत को बेचने का फैसला करता है. यहीं से 2,000 करोड़ की एक मनगढ़ंत फिल्म शुरू होती है, जिसमें दुनिया भर के फेल एक्टर, पुराने अंडरवर्ल्ड डॉन और बिल्कुल नए डायरेक्टर को जबरदस्ती कास्ट किया जाता है. असली रोमांच और हंसी तब शुरू होती है, जब एक अचानक और मजेदार मोड़ में नेता का सारा पैसा गायब हो जाता है. अब इस पूरी पागल, अनफिट और अजीब टीम के पास इस अधूरी फिल्म को पूरा करने और इसे सुपरहिट बनाने के लिए सिर्फ 24 घंटे हैं- सिर्फ एक दिन. बाद में, जब यह नकली शूटिंग टीम खतरनाक आतंकवादियों और असल दुनिया की चुनौतियों का सामना करती है, तो यह सिचुएशनल कॉमेडी का एक ऐसा जाल बनाती है जो दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देता है.

एक्टिंग
इस फिल्म में बॉलीवुड के अब तक के सबसे बड़े सितारों की सबसे बड़ी टीम है. अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, श्रेयस तलपड़े, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, आफताब शिवदासानी, दिशा पटानी, जैकलीन फर्नांडीज और लारा दत्ता जैसे चेहरे स्क्रीन पर लगातार मौजूद रहते हैं. लेकिन इस बड़ी भीड़ में सबसे बड़ा सरप्राइज सीनियर एक्टर किरण कुमार और फरीदा जलाल हैं. उनके बार-बार आने वाले रनिंग गैग्स (यानी, पूरी फिल्म में बार-बार आने वाले मजेदार जोक्स) फिल्म का दिल हैं. इसके अलावा, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, कीकू शारदा और कृष्णा अभिषेक की कॉमिक टाइमिंग फिल्म के वन-लाइनर्स को एक नए लेवल पर ले जाती है. फिल्म का सबसे मजेदार और रोंगटे खड़े कर देने वाला कल्ट मोमेंट इसके प्री-क्लाइमेक्स में आता है. जब रवीना टंडन बड़े पर्दे पर आती हैं, अक्षय कुमार की आंखों में सीधे देखकर पूछती हैं, ‘आप पिछले 20 साल कहां थे?’—90 के दशक की पुरानी यादें थिएटर में जिंदा हो जाती हैं. इस एक सीन ने थिएटर को दर्शकों की जोरदार तालियों और सीटियों से भर दिया.

डायरेक्शन और सिनेमैटोग्राफी
इतने सारे जाने माने एक्टर्स को एक ही फ्रेम में एक साथ दिखाना और किसी भी कैरेक्टर को नजरअंदाज न करना, डायरेक्टर अहमद खान के विजन की एक बड़ी जीत है. जहां फिल्म का पहला हाफ कैरेक्टर्स को जमाने में थोड़ा समय लेता है. वहीं दूसरा हाफ सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन की स्पीड से चलता है. कबीर लाल की शानदार सिनेमैटोग्राफी और फिरोज नाडियाडवाला के बड़े सेट स्क्रीन पर एक शानदार और देखने में शानदार एक्सपीरियंस देते हैं.

म्यूजिक
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और म्यूजिक इसकी तेज रफ्तार को पूरी तरह से कॉम्प्लिमेंट करते हैं. गाने बड़े स्केल पर शूट किए गए हैं, जो आंखों को अच्छे लगते हैं. अहमद खान का कोरियोग्राफी बैकग्राउंड साफ दिखता है, खासकर डांस नंबर्स में, जो फिल्म की कमर्शियल वैल्यू को काफी बढ़ाते हैं.

कमियां
हालांकि फिल्म एंटरटेनमेंट से भरपूर है, लेकिन इसका 2 घंटे 43 मिनट का रनटाइम कई बार थोड़ा लंबा लगता है. पहले हाफ में बहुत सारे गाने और कुछ किरदारों के आने से कहानी थोड़ी धीमी हो जाती है. इसके अलावा, जो दर्शक गहरे लॉजिक या रियलिस्टिक सिनेमा देखना चाहते हैं, उन्हें कुछ सीन थोड़े लाउड और बचकाने लग सकते हैं.

अंतिम फैसला
शॉर्ट में कहें तो , ‘माइंडलेस एंटरटेनर’ का मतलब यह नहीं है कि मेकर्स ने स्क्रीनप्ले में कोई मेहनत नहीं की. इसके उलट, ‘वेलकम टू द जंगल’ एक माइंडफुल एंटरटेनर है, जिसे दर्शकों को राहत और हंसी का एहसास देने के लिए समझदारी से बनाया गया है. अगर आप इस वीकेंड अपने पूरे परिवार, बच्चों और माता-पिता के साथ बिना किसी परेशानी के प्योर एंटरटेनमेंट का मजा लेना चाहते हैं और अपने पसंदीदा सितारों को स्क्रीन पर चमकते हुए देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखें. मेरी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार.



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