Last Updated:
Mango Pickle: अचार बनाने के लिए सही आम का चुनाव बहुत जरूरी है, क्योंकि गलत कैरी से अचार जल्दी खराब हो सकता है. बघेलखंड क्षेत्र में मिलने वाले जलीहा, खट्टवा और रामकेला आम अचार बनाने के लिए सबसे बढ़िया है. एक्सपर्ट बताते हैं कि अचार के लिए हमेशा सख्त, कच्चे और कम रेशे वाले आम ही चुनने चाहिए. सही कैरी चुनने से अचार का असली स्वाद सालों तक बरकरार रहता है और खराब होने की समस्या नहीं होती. (रिपोर्ट: राकेश पटेल/सीधी)
आम का अचार भारतीय रसोई का ऐसा स्वाद है, जो पूरे साल खाने की थाली की शान बना रहता है. लेकिन स्वादिष्ट और लंबे समय तक टिकने वाला अचार बनाने के लिए सबसे जरूरी है सही कैरी का चुनाव. कई लोग बाजार से कोई भी कच्चा आम खरीद लेते हैं, जिससे अचार जल्दी गल जाता है या उसका स्वाद बिगड़ जाता है. अगर आप चाहते हैं कि अचार महीनों तक खराब न हो और उसका स्वाद भी बना रहे, तो आम खरीदते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. आइए जानते हैं एक्सपर्ट की आसान सलाह.
सीधी की रसोइया प्रियंका सिंह के अनुसार, अचार के लिए हमेशा ऐसी कैरी चुननी चाहिए जिसका गूदा सख्त हो, खटास ज्यादा हो और रेशे कम हों. ऐसी कैरी मसालों को अच्छी तरह सोखती है और लंबे समय तक खराब नहीं होती. बहुत नरम या हल्की पकी कैरी का इस्तेमाल करने से अचार जल्दी गल सकता है. इसलिए खरीदते समय केवल पूरी तरह कच्चे और मजबूत आम ही चुनें. सही कैरी से बना अचार स्वादिष्ट होने के साथ लंबे समय तक सुरक्षित भी रहता है.
बघेलखंड क्षेत्र में मिलने वाला जलीहा आम अचार बनाने के लिए सबसे अच्छी किस्मों में गिना जाता है. यह आम तेज खटास और सख्त गूदे के लिए जाना जाता है. इसमें रेशे भी कम होते हैं, जिससे अचार का स्वाद और बनावट दोनों बेहतर रहती हैं. जलीहा आम मसालों के साथ अच्छी तरह मिल जाता है और लंबे समय तक खराब नहीं होता. यही वजह है कि कई गृहिणियां और अचार बनाने वाले लोग इस किस्म को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
खट्टवा आम आकार में भले ही छोटा होता है, लेकिन अचार के लिए यह बेहतरीन माना जाता है. इसकी तेज खटास और मजबूत गूदा अचार को लंबे समय तक टिकाऊ बनाते हैं. वहीं रामकेला आम भी किसानों और गृहिणियों की पहली पसंद है. कच्ची अवस्था में यह काफी सख्त और खट्टा होता है, इसलिए मसालों के साथ इसका स्वाद शानदार आता है. अगर बाजार में ये दोनों किस्में मिलें, तो अचार के लिए इन्हें जरूर चुनें.
अगर जलीहा, खट्टवा या रामकेला आम उपलब्ध न हों, तो राजापुरी और तोतापरी आम भी अच्छे विकल्प हैं. राजापुरी आम का आकार बड़ा होता है, इसका छिलका मोटा और गूदा अधिक होता है. वहीं तोतापरी आम अपनी लंबी चोंच जैसी आकृति और कम रस के कारण मसालों को अच्छी तरह सोख लेता है. इससे अचार का स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं. यही कारण है कि इन दोनों किस्मों का भी अचार में खूब इस्तेमाल किया जाता है.
प्रियंका सिंह के अनुसार, अचार के लिए कभी भी हल्के पके, नरम या ज्यादा रस वाले आम नहीं खरीदने चाहिए. ऐसे आम का अचार जल्दी खराब हो सकता है. बहुत मोटी गुठली वाले आम से भी बचना चाहिए, क्योंकि उनमें गूदा कम होता है. हमेशा ऐसे आम चुनें जिनमें गूदा ज्यादा और रेशे कम हों. सही कैरी चुनने से अचार लंबे समय तक स्वादिष्ट और सुरक्षित बना रहता है.
आम खरीदते समय उसका छिलका ध्यान से देखें. अचार के लिए कैरी का रंग गहरा हरा, छिलका साफ और बिना दाग-धब्बों वाला होना चाहिए. कटे, फटे या काले निशान वाले आम नहीं खरीदने चाहिए, क्योंकि वे जल्दी खराब हो सकते हैं. खरीदते समय आम को हल्के हाथ से दबाकर भी देखें. अगर वह नरम लगे, तो उसे अचार के लिए न लें. सख्त कैरी ही सबसे अच्छा विकल्प होती है.
आम खरीदते समय उसे सूंघना भी जरूरी है. यदि कैरी से मीठी खुशबू आने लगे, तो समझ लें कि वह पकने लगी है और अचार के लिए सही नहीं है. अचार के लिए हमेशा बिना खुशबू वाली, पूरी तरह कच्ची और सख्त कैरी ही खरीदनी चाहिए. एक्सपर्ट का कहना है कि सही किस्म और अच्छी गुणवत्ता की कैरी चुनने से अचार लंबे समय तक खराब नहीं होता और उसका स्वाद भी महीनों तक बरकरार रहता है.