मिथिलांचल का पारंपरिक मीठा ‘गुना मुना’ आज भी खास मौकों की शान बना हुआ है. खासकर शादी के बाद जब नई दुल्हन पहली बार ससुराल आती है, तब उसके स्वागत में यह पारंपरिक मिठाई बनाई जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह स्वादिष्ट होने के साथ 15 से 20 दिन तक खराब नहीं होती. गुना मुना बनाने के लिए आटा, गुड़, पानी, सौंफ और थोड़ा सा खस्ता लिया जाता है. सबसे पहले गर्म तेल या रिफाइन को आटे में मिलाकर अच्छी तरह गूंथा जाता है. इसके बाद आटे को कुछ देर ढककर रखा जाता है. फिर इसकी छोटी-छोटी लोइयां बनाकर बेलन जैसी थोड़ी मोटी और लंबी आकृति दी जाती है. इसके बाद इन्हें धीमी आंच पर घी या रिफाइन में सुनहरा होने तक तला जाता है. मोटा होने के कारण इसे अच्छी तरह पकाने के लिए धीमी आंच जरूरी होती है.
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