सुप्रीम कोर्ट ने आज गाजियाबाद में रेप पीड़िता चार साल की मासूम बच्ची को भर्ती करने से इनकार करने वाले दो निजी अस्पतालों को कड़ी फटकार लगाई है। डॉक्टर के पेशे में निहित संवेदनशीलता नहीं दिखाने को लेकर भी तीखी आलोचना की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने अस्पतालों और डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने उस बच्ची को इसलिए नजरअंदाज किया था क्योंकि वह गरीब थी। ऐसा करना मानवता को शर्मसार करने वाली आदत है और आपको अपने नाम से डॉक्टर शब्द ही हटा लेना चाहिए। बता दें कि गाजियाबाद में रेप पीड़िता चार साल की बच्ची की मौत हो गई। उस बच्ची को प्राइवेट अस्पतालों ने एडमिट करने से मना कर दिया था और इस वजह से उसे मृत घोषित कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने उन निजी अस्पतालों को फटकार लगाई, जिन पर गाज़ियाबाद में रेप और मर्डर की शिकार चार साल की बच्ची को शुरुआती इलाज ना देने का आरोप है। निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर CJI सूर्य कांत की तल्ख टिप्पणी। कहा-अगर आप अपनी ड्यूटी नहीं निभाते हैं, तो आपको अपने नाम के साथ ‘डॉक्टर’ लिखने का कोई हक नहीं। अगर आपमें थोड़ी भी संवेदनशीलता होती, तो सुविधा न होने पर भी आप उस बच्ची को दूसरे अस्पताल ले जाते।

क्या आपने इसलिए उसे नज़रअंदाज़ किया क्योंकि वह गरीब थी? 

क्या वह आपकी फीस नहीं दे सकती थी?’

सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों से कहा कि वे पीड़ित परिवार की मदद के लिए अपनी मर्ज़ी से दान दें, वरना उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।

 





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