देशभर के कई धार्मिक संस्थानों में वित्तीय अनियमितताओं की खबरों के बीच मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में मंदिर प्रबंधन ने पारदर्शिता की पहल करते हुए दान पेटियों में प्राप्त राशि का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया है। ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट और ममलेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति ने दान पेटियों की गिनती कर श्रद्धालुओं से मिले दान की जानकारी साझा की है। ट्रस्ट द्वारा बताया गया कि आगामी सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए ममलेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मंदिर प्रबंधन समिति का गठन किया गया है। समिति द्वारा दान पेटियों से मिलने वाली राशि का उपयोग मंदिर परिसर में आवश्यक सुविधाओं के विकास पर किया जा रहा है।

ममलेश्वर मंदिर के पांच दान पात्रों से 6 लाख 71 हजार से ज्यादा की राशि प्राप्त

16 जुलाई को ममलेश्वर मंदिर के कुल पांच दान पात्र खोले गए। इनमें 2 जुलाई से 16 जुलाई तक की अवधि के दौरान ममलेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के दानपात्र में प्राप्त दान की गणना की गई। ये गणना तहसीलदार, जिला कोषालय अधिकारी के प्रतिनिधि, मंदिर कर्मचारियों और बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में की गई। गिनती में कुल 6 लाख 71 हजार 865 रुपये की दान राशि प्राप्त हुई।

दानपात्र की राशि का क्या होगा?

मंदिर समिति ने ये भी बताया कि दानपात्र से प्राप्त रुपयों का क्या और कहां इस्तेमाल होगा। मंदिर समिते के अनुसार इस राशि से मंदिर परिसर में राशि गणना के लिए टीन शेड, मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिए शेड, स्टील रेलिंग, सीसीटीवी कैमरे, शौचालय और सुविधाघर का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा मंदिर में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन और अन्य जरूरी कामों पर भी यह राशि खर्च की जा रही है।

ओंकारेश्वर मंदिर के दान पात्र भी खोले गए

शनिवार को श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के भी सात दान पात्र खोले गए। दान राशि की गणना तहसीलदार, पटवारी, मंदिर के सहायक कार्यपालन अधिकारी, बैंक कर्मचारियों और मंदिर कर्मचारियों की उपस्थिति में की गई और ओंकारेश्वर मंदिर के दान पात्र से कुल 20 लाख 86 हजार 300 रुपये की दान राशि प्राप्त हुई है।

15 दिनों में 27 लाख से ज्यादा का दान

वहीं दोनों मंदिरों की दान राशि की बात की जाए तो दोनों मंदिरों की दान राशि मिलाकर केवल 15 दिनों में श्रद्धालुओं ने 27 लाख 58 हजार 165 रुपये का दान दिया। मंदिर प्रबंधन का कहना है, कि दान राशि का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं में वृद्धि और मंदिर परिसर के विकास कार्यों पर किया जाएगा। यह पहल मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही को भी दर्शाती है।

(खंडवा से प्रतीक मिश्रा की रिपोर्ट)

ये भी पढ़ेंः ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान के दौरान डूबने लगा बीटेक छात्र, रेस्क्यू टीम की मुस्तैदी से टला हादसा, बचाई जान





Source link

Write A Comment