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Bikaner Special Sweets: बीकानेर अपनी नमकीन के साथ-साथ मिठाई के लिए भी फेमस है. खासकर बीकानेर के स्पंजी रसगुल्ले की डिमांड सिर्फ राजस्थान ही नहीं देश के अन्य शहरों में भी है. स्पंजी रसगुल्ले को बनाने के लिए काफी अनुभव की जरूरत पड़ती है. रूई की तरह और रस से लबालब रसगुल्ले मुंह में जाते ही घुल जाता है. मिठाई कारोबारी रामेश्वरलाल गोदारा बताते हैं कि इसकी कीमत 280 रूपए किलो हैं और कोलकाता, मुबई जैसे शहरों में भी सप्लाई होती है. बीकानेर में इस मिठाई का कारोबार करोड़ों तक पहुंच चुका है.
बीकानेर. भुजिया, नमकीन और रसगुल्ले की मिठास के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखने वाला बीकानेर आज भी अपने खास स्पंजी रसगुल्ले के दम पर मिठाई प्रेमियों का दिल जीत रहा है. रुई की तरह मुलायम, रस से लबालब और मुंह में जाते ही घुल जाने वाला यह रसगुल्ला अपनी अनोखी बनावट के कारण सामान्य रसगुल्लों से अलग माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यदि इसे हाथ से दबा दिया जाए तो यह कुछ ही क्षणों में फिर से अपनी पुरानी गोल और फूली हुई आकृति में लौट आता है.
280 रूपए किलो है स्पंजी रसगुल्ले की कीमत
मिठाई कारोबारी ने बताया कि यह रसगुल्ला दो दिन तक खराब नहीं होता है. बाहर भेजते समय इसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसे ठंडी जगह या फ्रिज में सुरक्षित रखा जाता है, जिससे रसगुल्ला अपनी ताजगी और स्पंजी बनावट बरकरार रखता है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में स्पंजी रसगुल्ले की कीमत करीब 280 रुपये प्रति किलो है. रोजाना जितने स्पंजी रसगुल्ले तैयार किए जाते हैं, लगभग सभी उसी दिन बिक जाते हैं. बड़े आयोजनों, शादियों और विशेष अवसरों के लिए पहले से ऑर्डर भी लिए जाते हैं. उन्होंने बताया कि हर वर्ष इस मिठाई का कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच जाता है और लगातार बढ़ती मांग के कारण इसका उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है. स्पंजी रसगुल्ले को बनाने के लिए काफी सावधानी बरतनी पड़ती है.
ऐसे बनती है स्पंजी रसगल्ले
रामेश्वरलाल गोदारा ने बताया कि स्पंजी रसगुल्ले को अनुभवी कारीगर ही बना सकते हैं, क्योंकि जरा सी लापरवाही आपकी मेहनत को बबर्वाद करसकती है. उन्हों ने बताया कि सबसे पहले शुद्ध दूध को गर्म किया जाता है और फिर उसे फाड़कर ताजा छेना तैयार किया जाता है. इसके बाद छेने को अच्छी तरह छानकर अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाता है. फिर उसे हाथों से लंबे समय तक मसलकर मुलायम लोई तैयार की जाती है. इस लोई से छोटे-छोटे गोल आकार के रसगुल्ले बनाए जाते हैं और उन्हें विशेष अनुपात वाली पतली चाशनी में पकाया जाता है. पकने के बाद भी इन्हें उसी हल्की चाशनी में रखा जाता है, जिससे रसगुल्ले के अंदर पर्याप्त रस बना रहता है और उसकी स्पंजी बनावट कायम रहती है.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…
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