राज्य सभा सांसद विजयेंद्र प्रसाद ने पेपर लीक की समस्या पर अपने विचार व्यक्त किये हैं। उन्होंने देश में लगातार सामने आ रही प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को देखते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक और संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके मुताबिक यदि परीक्षा प्रक्रिया को नए सिरे से डिजाइन किया जाए और प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा शुरू होने तक का समय न्यूनतम कर दिया जाए, तो पेपर लीक की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

MCQ परीक्षाओं के लिए क्या हो सकता है?

सुझाव है कि प्रत्येक विषय के लिए 5,000 या उससे अधिक प्रश्नों का एक बड़ा सार्वजनिक प्रश्न बैंक तैयार किया जाए। इसमें आसान, मध्यम और कठिन स्तर के प्रश्नों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के कॉन्सेप्ट आधारित प्रश्न शामिल हों। पूरा प्रश्न बैंक सार्वजनिक होने से अभ्यर्थियों को पहले से ही सभी संभावित प्रश्नों तक पहुंच मिल जाएगी। ऐसे में किसी प्रश्नपत्र के लीक होने का महत्व काफी हद तक समाप्त हो जाएगा।

परीक्षा के दिन ही सुरक्षित केंद्रीय नियंत्रण कक्ष में विशेषज्ञों की मौजूदगी में कंप्यूटर एल्गोरिदम के माध्यम से प्रश्नों का यादृच्छिक चयन किया जाए। अंतिम प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसे एन्क्रिप्ट कर सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से सभी परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाए और निर्धारित समय पर एक साथ खोला जाए।

इस व्यवस्था में अंतिम प्रश्नपत्र तैयार होने और परीक्षा शुरू होने के बीच केवल लगभग 15 मिनट का अंतर रहेगा। इससे किसी भी स्तर पर प्रश्नपत्र बाहर जाने की संभावना बेहद कम हो जाएगी।

वर्णनात्मक और OMR परीक्षाओं के लिए सुझाव

वर्णनात्मक और OMR आधारित परीक्षाओं के लिए प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर ही सुरक्षित प्रिंटिंग व्यवस्था विकसित की जा सकती है। प्रश्नपत्र परीक्षा वाले दिन उसी केंद्र पर प्रिंट किए जाएं। पूरी प्रक्रिया CCTV निगरानी में हो और प्रिंट होने के तुरंत बाद कमरेवार सीलबंद पैकेट बनाकर सीधे परीक्षा कक्ष तक पहुंचा दिए जाए।

इस व्यवस्था से पहले से बड़े पैमाने पर प्रिंटिंग, गोदाम में भंडारण, लंबी दूरी तक परिवहन और कई स्तरों पर मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता लगभग समाप्त हो जाएगी। यही वे चरण हैं जहां से अधिकतर पेपर लीक की आशंका पैदा होती है।

अन्य महत्वपूर्ण सुझाव

  • परीक्षा शुरू होने से पहले परीक्षा केंद्र को पूरी तरह सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए।
  • अभ्यर्थियों और परीक्षा कर्मियों के मोबाइल फोन तथा अन्य संचार उपकरण पहले ही जमा करा लिए जाएं।
  • अंतिम प्रश्नपत्र तैयार होने तक किसी भी व्यक्ति को बाहरी दुनिया से संपर्क की अनुमति न हो।
  • प्रश्नपत्र केवल निर्धारित समय पर ही स्वतः खुलने वाली डिजिटल प्रणाली से उपलब्ध कराया जाए।
  • पूरी प्रक्रिया की डिजिटल और वीडियो निगरानी सुनिश्चित की जाए।

यदि इस प्रकार के संरचनात्मक सुधार लागू किए जाते हैं, तो केवल निगरानी बढ़ाने के बजाय पूरी परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सकता है तथा प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर स्थायी रूप से अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।





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