विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “हम 4 अगस्त, 2026 को यमन के तट के पास लाल सागर में डूबे भारतीय झंडे वाले कमर्शियल जहाज़, MSV फ़ैज़ नूर ओलिया पर हुए हमले की निंदा करते हैं। सभी 13 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया है। रियाद में हमारा दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और क्रू की सुरक्षा के लिए यमनी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है। हम सहयोग के लिए यमनी अधिकारियों का धन्यवाद करते हैं।
बयान में आगे कहा गया, “इस इलाके में कमर्शियल जहाज़ों पर लगातार हो रहे हमले बहुत चिंताजनक हैं। इस इलाके में कमर्शियल जहाज़ों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए, और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक, इस इलाके के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से जहाज़ों की आवाजाही और व्यापार को बिना किसी रुकावट के जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।”
अनादोलु न्यूज एजेंसी के अनुसार, यमन की सरकार का समर्थन करने वाली ‘नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज’ (NRF) ने बताया कि अल-हुदैदाह के दक्षिण में लगभग 13 नॉटिकल मील की दूरी पर जहाज पर हमला हुआ, जिससे वह डूब गया। इसके बाद यमनी नौसेना और कोस्ट गार्ड ने मिलकर बचाव अभियान चलाया और सभी 14 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया; इनमें 13 भारतीय नाविक और एक यमनी नागरिक शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया और उन्हें मेडिकल मदद दी गई; किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
बता दें कि ‘नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज’ (NRF) को यमन के पश्चिमी तट पर बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास तैनात किया गया है और इसका नेतृत्व यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के सदस्य तारेक सालेह करते हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब कमर्शियल जहाजों पर हमलों के फिर से बढ़ने के कारण लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
इससे पहले 20 जुलाई को हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ “नौसैनिक नाकाबंदी” की घोषणा की थी, जिसके जवाब में रियाद ने चेतावनी दी कि वह अपने जहाजों को निशाना बनाने वाली धमकियों का कड़ा जवाब देगा। बाब अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और यह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट है।
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