रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रदर्शन का आज 12वां दिन है। झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में अनियमितताओं के खिलाफ़ आवाज़ उठा रहे छात्र परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। रांची के स्टेडियम में देवेन्द्र नाथ महतो की भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है। प्रदर्शनकारी अब विधानसभा घेराव की तैयारी कर रहे हैं लेकिन उससे पहले आज एक विशाल कैंडल मार्च निकालने की तैयारी है। इस बीच खबर है कि आज झारखंड सरकार के कुछ मंत्री और अफसरों की कमेटी आज छात्रों से मुलाकात कर सकती है।
देवेन्द्र नाथ महतो के साथियों ने क्या कहा?
अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे देवेन्द्र नाथ महतो के साथियों का कहना है कि वो किसी मंत्री या कमेटी से बात नहीं करेंगे बल्कि सीधे सीएम हेमंत सोरेने को बात करनी होगी और परीक्षा का रद्द करना पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों की ये भी मांग की है परीक्षा में धांधली की जांच सीबीआई से करवाई जाए।
अब तक कुल 14 आरोपी CID के शिकंजे में आए
JPSC परीक्षा में धांधली को लेकर रांची में एक तरफ छात्रों का आंदोलन चल रहा है तो वहीं सीआईडी भी लगातार एक्शन ले रही है। CID ने इस मामले में अब तक 14 आरोपियों को दबोच लिया है। मंगलवार को एजेंसी ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों की पहचान उमेश कुमार, बुधेश्वर भगत और रमेश कुमार के रूप में हुई है। सीआईडी ने 18 ठिकानों पर छापेमारी करके ब्लैंक चेक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। सीआईडी ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में बिचौलियों, मास्टरमाइंड और कोचिंग संचालकों से जुड़े 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इन सारी छापेमारी और जांच के दौरान पेपर लीक के मास्टरमाइंड अभय तिवारी को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है।
CID के मुताबिक-
- गिरफ्तार आरोपी परीक्षा करवाने वाली एजेंसी TDPL के साथ मिलकर काम करते थे। आरोपी अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के लिए कथित तौर पर “सेटिंग-गेटिंग” का नेटवर्क चला रहे थे।
- यह भी पता लगाया जा रहा है कि परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर कितने अभ्यर्थियों से कितनी रकम वसूली गई। छात्रों से वसूली गई अवैध कमाई का बंटवारा किन-किन लोगों के बीच हुआ।
कौन है अभय तिवारी?
छात्रों के आंदोलन का असर शुरू हो चुका है। पेपर लीक माफिया के चेहरे सामने आ रहे हैं। इनमें से एक चेहरा है अभय तिवारी का, ये वो शख्स है जो झारखंड में परीक्षा धांधली माफिया का पोस्टर बॉय बन चुका है। रांची में छात्र जिस जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करवाने के लिए प्रोटेस्ट कर रहे हैं, उस परीक्षा को टीडीपीएल कंपनी ने कंडक्ट कराया था और नतीजा आया तो सेकेंड टॉपर अभय तिवारी निकला। हैरानी की बात है कि अभय तिवारी इसी टीडीपीएल कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर भी है।
पेपर में धांधली को कैसे अंजाम दे रहा था अभय तिवारी?
- झारखंड में पेपर लीक का मास्टरमाइंड अभय तिवारी ये सारे खेल डबल रोल में कर रहा था। अभय तिवारी ने दो नाम रख रखे थे। उसने अपना दूसरा नाम मनोज तिवारी रखा था।
- अभय तिवारी के नाम से गोड्डा ब्लॉक सप्लायर ऑफिसर की नौकरी कर रहा था और मनोज तिवारी के नाम से टीडीपीएल में मार्केटिंग मैनेजर बना हुआ था।
- धांधली के मास्टरमाइंड अभय तिवारी न सिर्फ सिविल एग्ज़ाम में सेकेंड टॉपर बना बल्कि उसने 2013 से अब तक 12 प्रतियोगी परीक्षाएं भी पास की हैं।
- अभय तिवारी के ठिकाने से CID को जिन परीक्षाओं में सफल होने के सर्टिफिकेट मिले हैं, उनमें 2018 की पुलिस अवर निरीक्षक लिखित परीक्षा, नौसेना में एसएआर पद के लिए वर्ष 2013 में हुई लिखित परीक्षा, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर यानी बीएआरसी में सहायक पद के लिए 2014 की लिखित परीक्षा, IRB कांस्टेबल लिखित परीक्षा, 2018 की सीआरपीएफ हेडकांस्टेबल परीक्षा, 2014 में नॉर्दर्न कोल फील्ड्स यानी एनसीएल की प्रारंभिक परीक्षा, जेएसएससी की पीजीटी शिक्षक और सीजीएल परीक्षाएं और जेपीएससी की एसीएफ, एफआरओ, एफएसओ और 11वीं-13वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षाएं शामिल हैं।
प्री एग्जाम क्लीयर कराने का रेट 5 लाख, मेन्स का 25 लाख
सीआईडी को इस मास्टरमाइंड अभय तिवारी के खिलाफ कई अहम डिजिटल सबूत और दस्तावेज भी मिले हैं। इनमें लैपटॉप, मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों की पासबुक और चेकबुक, अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड, मार्कशीट सहित कई अन्य दस्तावेज शामिल हैं। अभय तिवारी ने जेपीएससी सिविल सर्विस का प्री एग्जाम क्लीयर कराने का रेट पांच लाख रुपये रखा गया था। मेन्स क्लीयर कराने का रेट 25 लाख रुपये था, इसमें अभय तिवारी 10 लाख रुपये एडवांस लेता था।
जो लोग लोग तुरंत पैसे नहीं दे पाते थे उनसे वो ब्लैंक चेक ले लेता था, CID को हजारीबाग में जमीन के पेपर और खाली चेक के रूप में इसके सबूत भी मिले हैं। अब तक की जांच में पता लगा है कि अभय तिवारी ने टीडीपीएल यानी TSR Data Processing Private Limited के जरिए ऐसी घुसपैठ कर ली थी कि कोई भी परीक्षा को वो चुटकियों में निकाल लेता था।
भाई, साली और भाभी को दिलाई सरकारी नौकरी
दरअसल, अभय तिवारी मनोज के नाम से टीडीपीएल में मार्केटिंग मैनेजर बना हुआ था। झारखंड सरकार ने जेएसपीसी और जेएसएससी का एग्जाम कराने का टेंडर टीडीपीएल को दिया था जबकि टीडीपीएल यूपी और बिहार जैसे राज्यों में ब्लैकलिस्टेड कंपनी है। इसके बावजूद टीडीपीएल को इस साल जेएसपीसी की 14वीं सालाना परीक्षा कराई। इस परीक्षा के जरिए अभय तिवारी ने अपने भाई, साली और भाभी को भी सरकारी नौकरी दिलाई।
TDPL को लेकर चौंकाने वाली जानकारी आई सामने
- TDPL के पास एग्जाम कंडक्ट कराने की जिम्मेदारी थी, इसे लेकर भी कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। TDPL का ऑफिस लखनऊ में है, 2018 के ग्रामीण विकास अधिकारी एग्जाम में धांधली हुई। आरोप TDPL पर लगा। 2021 में एसआईटी ने इस कंपनी के डायरेक्टर रामबीर और सत्यपाल को अरेस्ट किया। इस कंपनी पर यूपी विधानसभा स्टाफ नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप लगे। इसके बाद इस कंपनी को यूपी सरकार ने ब्लैक लिस्ट कर दिया लेकिन झारखंड सरकार इस पर मेहरबान रही।
- TDPL के खिलाफ कई शिकायतें आई, हर शिकायत को नजरअंदाज किया गया। मई 2025 में झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन ने पहली बार इस कंपनी पर एक्शन लिया। TDPL को ब्लैकलिस्ट किया गया लेकिन एक महीने बाद जून में ही ये बैन हट गया और फिर से कंपनी को एग्जाम कंडक्ट कराने की परमिशन मिल गई। पता लगा है कि इस साल फरवरी में रांची के शिकायतकर्ता ने JPSC को एक शिकायत दी।
जाहिर है हेमंत सोरेन सरकार के दौरान बड़ी गड़बड़ियां हुई हैं और इसका शिकार बने हैं झारखंड के होनहार छात्र इसीलिये वो इंसाफ की मांग लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वहीं, छात्रों के प्रदर्शन पर सीएम हेमंत सोरेन का रिएक्शन सामने आया है। हेमंत सोरेन का दावा है जांच ठीक से हो रही है। सोरेन ने कहा कि वो पेपर लीक पर गंभीर हैं, सीना चीरकर नहीं दिखा सकते।
(रिपोर्ट- मुकेश सिन्हा)
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