पंजाब में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। उससे पहले राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बीच, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और लुधियाना से लोकसभा सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि वैसे तो ये फैसला राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को करना है।

इससे पहले सोमवार को अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा था कि वो अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। दरअसल, पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और विरोध के बीच प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने साफ कर दिया है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। हाल के दिनों में पार्टी के कई कार्यक्रमों के दौरान उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों की नारेबाजी का सामना करना पड़ा है, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज थीं।

भूपेश बघेल की मौजूदगी में दो टूक बयान

बठिंडा और मुक्तसर में पार्टी के ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रमों के दौरान पंजाब कांग्रेस प्रभारी और एआईसीसी महासचिव भूपेश बघेल की मौजूदगी में मीडिया से बातचीत करते हुए राजा वडिंग ने इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया। मीडिया के एक सवाल के जवाब में वडिंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं इस्तीफा नहीं दूंगा।”

हाईकमान के फैसले का सम्मान

वडिंग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पार्टी नेतृत्व उन्हें इस पद से हटाने का कोई फैसला करता है, तब भी वह एक निष्ठावान सिपाही की तरह पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी मेहनत से काम करते रहेंगे। अपनी कार्यशैली का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ पार्टी के लिए काम किया है। उनके नेतृत्व में ही 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने राज्य की 13 में से 7 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी।

गुटबाजी और विरोध पर सियासत गरमाई

पार्टी के भीतर पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वडिंग के समर्थकों के बीच खींचतान व नारेबाजी की घटनाओं ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस की सिरदर्दी बढ़ा रखी है। हालांकि, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और प्रभारी भूपेश बघेल की मौजूदगी में वडिंग के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि वह फिलहाल आसानी से पीछे हटने वाले नहीं हैं, और आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर गुटबाजी को थामना कांग्रेस हाईकमान के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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