कोलकाता में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) विधायक नौशाद सिद्दीकी ने दावा किया कि उन्हें विभिन्न इलाकों से लगातार फोन कॉल आ रहे हैं, जिनमें बताया जा रहा है कि पुलिस ने मस्जिद समितियों को बुलाकर माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के लिए कहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मस्जिद समितियों ने पुलिस से इस संबंध में कोई लिखित आदेश या अधिसूचना दिखाने को कहा तो पुलिस ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी।
जारी करना होगा लिखित आदेश- सिद्दीकी
सिद्दीकी के मुताबिक, पुलिस ने केवल इतना कहा कि “हमने कह दिया है, इसलिए ऐसा करना होगा।” उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में लाउडस्पीकर हटाना चाहता है तो उसे पहले लिखित आदेश जारी करना चाहिए या फिर पुलिस स्वयं आकर कार्रवाई करे।
लोगों को प्रशासन से टकराव से बचने की अपील
ISF विधायक ने बताया कि उन्होंने लोगों से प्रशासन के साथ किसी तरह के टकराव से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर पहले भी कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो चुकी है।
निर्धारित डेसिबल सीमा के अंदर ही चल रहे लाउडस्पीकर
नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने औद्योगिक, आवासीय, व्यावसायिक और साइलेंस जोन के लिए अलग-अलग डेसिबल सीमा निर्धारित की है। उनका दावा है कि अधिकांश मस्जिदों में लाउडस्पीकर निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर ही संचालित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई मस्जिद तय सीमा का उल्लंघन करती है तो उसके लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
खटखटाएंगे कोर्ट का दरवाजा
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इस मामले में ISF अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी ईमेल के जरिए शिकायत भेजी गई है।
सरकार बदलने के बाद से कई तरह के बदलाव
बंगाल में भाजपा की सरकार के आने के बाद से कई तरह के बदलाव नजर आ रहे हैं। स्थानीय प्रशासन अपने तरीके से चीजों को बदलने में लगा हुआ है। मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने की अपील अभी पुलिस ने स्थानीय लोगों से की है। इसमें अभी प्रशासन की तरफ से कोई लिखित में आदेश नहीं दिया गया है।
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