दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर-मंतर पर 10 अगस्त को प्रस्तावित दलित ईसाइयों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने का फैसला दिल्ली पुलिस पर छोड़ दिया है। कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, इसलिए वही इस पर फैसला करेगी। जस्टिस अमित महाजन ने सुनवाई के दौरान कहा कि उनकी निजी राय में शहर के बीचों-बीच प्रदर्शन नहीं होने चाहिए, क्योंकि इससे आम लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा, “शहर को बंधक मत बनाइए, फैसला पुलिस को करने दीजिए।”
याचिकाकर्ता ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी (AIDCRPC) की ओर से वरिष्ठ वकील संजय घोष ने कहा कि संगठन सिर्फ 75 लोगों के साथ 10 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना देना चाहता है। उन्होंने कोर्ट से सिर्फ इतना आग्रह किया कि दिल्ली पुलिस उनके अनुमति आवेदन पर फैसला करे।
केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि संगठन ने स्थानीय अधिकारियों से जरूरी एनओसी नहीं ली है। उन्होंने यह भी बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने का मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके अलावा स्वतंत्रता दिवस नजदीक होने और सुरक्षा व्यवस्था के कारण दिल्ली में बीएनएसएस की धारा 163 लागू है।
शनिवार तक फैसला करेगी दिल्ली पुलिस
एएसजी ने कहा कि अभी 75 लोगों की बात हो रही है, लेकिन बाद में भीड़ कितनी बढ़ जाए, यह कहना मुश्किल है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि दिल्ली पुलिस आवेदन पर फैसला करके शनिवार तक अपना निर्णय बता देगी। इसके बाद हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए दिल्ली पुलिस को आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश दिया।
सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान हुई थी हिंसा
पिछले महीने जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। 20 जुलाई को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था और पुलिस के ऊपर भी पत्थरबाजी की गई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र जंतर-मंतर पर जमा हो गए थे। इससे पूरे इलाके में भारी भीड़ हो गई थी। कनॉट प्लेस की दुकानें भी रात में जल्दी बंद होने लगी थीं। सुरक्षा व्यवस्था के कारण दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन भी बंद किए गए थे। इससे आम लोगों को खासी परेशानी हुई थी। इसी वजह से इस बार पुलिस अनुमति देने से पहले सभी पहलुओं को ध्यान में रख रही है।
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