बिहार की राजनीति में हाल ही में स्वास्थ्य विभाग द्वारा खरीदे गए डस्टबिन की कीमतों को लेकर एक नया विवाद छिड़ गया है। इस मुद्दे ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक काफी गरमा-गर्मी पैदा कर दी है। दरअसल रजेडी प्रमुख लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक यूट्यूबर की रिपोर्ट के आधार पर डस्टबिन घोटाले का आरोप लगाया है। यूट्यूबर ने बेगूसराय के रहने वाले व्यक्ति की तरफ से किए गए आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर बताया है कि सरकार ने 15490 रूपये में डस्टबिन खरीदा है। RTI से मिली क़ीमत की तुलना बाजार में मिलने वाले सामान्य डस्टबिन से RTI फ़ाइल करने वाले व्यक्ति ने की है। यूट्यूबर ने इसी तुलनात्मक चार्ट के आधार पर वीडियो बनाया है जिसे रोहिणी ने पोस्ट कर सरकार पर आरोप लगाए हैं।
रोहिणी आचार्य ने लगाए गंभीर आरोप
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता और लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सरकार को घेरते हुए “डस्टबिन घोटाला” का गंभीर आरोप लगाया है। रोहिणी आचार्य ने पोस्ट करते हुए लिखा कि बिहार में डस्टबिन भी ‘वीवीआईपी’ हो गए हैं। जिस साधारण डस्टबिन की बाजार में वास्तविक कीमत महज 1,500 रुपये के आसपास है, उसे सरकारी विभाग द्वारा लगभग 15,490 रुपये की अत्यधिक ऊंची कीमत पर खरीदा गया है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “कूड़ेदान छोटा, लेकिन बिल दस गुना बड़ा!” उन्होंने सवाल उठाया कि यह कचरा रखने का डिब्बा है या सरकारी खजाने को खाली करने का कोई नया जरिया?
बता दें कि जिस व्यक्ति ने बेगूसराय में RTI फ़ाइल किया था वो कैमरे पर बातचीत को तैयार नहीं है लेकिन उसने कई PDF फ़ाइल भेजी है। इसमें कई निविदा की शर्तो में बदलाव किये जाने समेत अन्य जानकारी के अलावा डस्टबिन की सरकार से मिली क़ीमत 15490 का जिक्र है। उसने बाजार में मिलने वाले आम डस्टबिन से सरकार के डस्टबिन की तुलना करके एक प्राइस चार्ट खुद से बनाया है जिसमें बाजार से 1500 में डस्टबिन मिलने का जिक्र किया गया है।
ट्रेंडर की स्पेसिफ़िकेशन में “माइक्रोवेव में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक, कस्टमाइज़्ड बिन” और “माइक्रोवेव के लिए मेज़र बिन” शामिल हैं। 75L क्षमता भी दी गई है। साथ में इसे माइक्रोवेव में इस्तेमाल के लायक और समर्पित यूटिलिटी के लिए अनुकूलित बताया गया है। इसलिए 15,490 में संभवतः केवल प्लास्टिक कंटेनर ही नहीं, बल्कि कोई विशेष डिज़ाइन/स्पेसिफ़िकेशन, कस्टमाइज़ेशन, सप्लाई की शर्तें आदि हो सकती हैं। दस्तावेज़ में 15,490 रुपये की कीमत का ब्रेकअप नहीं है। यह भी पता करना होगा कि डस्टबिन किस मटीरियल, डाइमेंशन, मोटाई, पहिए, माइक्रोवेव कम्पैटिबिलिटी, हीट रेजिस्टेंस आदि स्पेसिफ़िकेशन का है। इसलिए 15,490 की तुलना सामान्य डस्टबिन से करना शायद सही नहीं होगा।
जब टेंडर में जिक्र स्पेसिफ़िकेशन को गूगल पर सर्च किया तो क़ीमत करीब 7500 के आसपास दिखती है लेकिन इसके अलावा अन्य शर्ते क्या थी, ये जानने के बाद ही आखिरी क़ीमत क्या हो सकती है इसका पता किया जा सकता है। इस संबंध में टेंडर निकालने वाली संस्था BMSICL (Bihar Medical Services and Infrastructure Corporation Limited)को दिया गया था।
BMSICL के एमडी ने क्या कहा
BMSICL के नए MD सुब्रत सेन से बताया कि उन्होने इस बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि जिस डस्टबिन की इतनी चर्चा हो रही है वो उनसे पहले रहे एमडी के समय खरीदा गया था और ये कोई आम डस्टबिन नहीं है जैसा समझा जा रहा है बल्कि अस्पताल में संक्रमण खत्म करने के लिए लगाई जाने वाली माइक्रोवेव मशीन का एक सामान है। इसमें लगाई जाने वाली पॉलीथिन भी आम पॉलीथिन नहीं है क्योंकि मशीन में काफी अधिक तापमान में डस्टबिन को ही अंदर ले जाया जाता है और मेडिकल वेस्ट को फेंका जाता है। इसलिए डस्टबिन के साथ साथ इसकी पॉलीथिन भी अलग होती है। खरीद की गयी डस्टबिन और पॉलीथिन दोनों को सही क़ीमत पर खरीदा गया है। BMSICL की तरफ से आज एक लिखित स्पष्टीकरण भी जारी किया जायेगा।