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बलिया का सत्तू पूरे प्रदेश, देश और विदेश में एक अलग महत्व रखता है. सरकार की महत्वाकांक्षी ODOP योजना में बलिया से सत्तू को शामिल किया चुका है. उन्होंने आगे बताया कि, सत्तू तैयार करने के लिए गांवों में चने को पारंपरिक तरीके से गोसार में भूनकर चक्की में पीसा जाता है. डॉक्टरों के अनुसार भी सत्तू का सेवन करने वालों को भरपूर मात्रा में प्रोटीन मिलता है.
बलियाः बलिया का सत्तू अब देश-विदेश में अपनी खास पहचान बना रहा है. उत्तर प्रदेश के जनपद बलिया का यह विशेष, स्वादिष्ट और प्रोटीन से भरपूर सत्तू अब सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना में शामिल हो गया है, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ गई है. बलिया में किसान बड़े पैमाने पर चने की खेती करते हैं. गांवों में आज भी पारंपरिक तरीके से गोसार (भट्ठी) में चने को भूना जाता है और फिर उसे पीसकर सत्तू तैयार किया जाता है. इस पारंपरिक विधि से बने सत्तू का स्वाद बेहद लाजवाब होता है.
पूरे देश में फेमस है बलिया क सत्तू
बलिया निवासी दीपक तिवारी ने बताया कि, बलिया का सत्तू पूरे प्रदेश, देश और विदेश में एक अलग महत्व रखता है. सरकार की महत्वाकांक्षी ODOP योजना में बलिया से सत्तू को शामिल किया चुका है. उन्होंने आगे बताया कि, सत्तू तैयार करने के लिए गांवों में चने को पारंपरिक तरीके से गोसार में भूनकर चक्की में पीसा जाता है. डॉक्टरों के अनुसार भी सत्तू का सेवन करने वालों को भरपूर मात्रा में प्रोटीन मिलता है. इसको लोग बलिया से देश-विदेश में मंगाकर सेवन कर रहे है, जिससे बलिया को भी लाभ मिल रहा है. ODOP में शामिल होने से इसे बलिया में ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में भी एक अलग पहचान मिल रही है. आने वाले समय में बलिया के लोगों को इसका भरपूर लाभ मिलेगा और सत्तू का विकास होगा.
प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत
बलिया निवासी मंटू कुमार ने कहा कि, सत्तू को प्रोटीन का एक अच्छा माध्यम बताया जाता हैं. आज यह बलिया में ही नहीं, बल्कि देश से अलग उठकर विदेशों को भी लुभा और आकर्षित कर रहा है. जब से वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में सत्तू को बलिया से शामिल किया गया है, तब से यह और भी चर्चा का विषय बना हुआ है. खेत से चना निकलने के बाद गांवों में गोसार (भट्ठी) हुआ करती है, जहां महिलाएं गीत गाकर चने (और अन्य अनाज) भूनती हैं.
इसके बाद, चक्की में पीस लिया जाता है और वह पूरी तरह से सत्तू तैयार हो जाता है. इसे अलग-अलग तरीके से प्रयोग में लिया जाता है. इसकी लस्सी या सीधे नमक और पानी की सहायता से गूंथ कर भी अचार, हरी मिर्च या चटनी के साथ खाया जा सकता है. कई प्रकार से इसके स्वाद का लुफ्त उठाया जा सकता है. इसको खाने से प्यास न लगने की समस्या भी दूर हो जाती है और अच्छे से प्यास लगती है. इसी के कारण बलिया जनपद में व्यवसाय के नए-नए रास्ते भी खुल रहे हैं.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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