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Rishikesh Best Shops: ऋषिकेश के बाजारों में आज भी कुछ ऐसी दुकानें हैं, जिनके आगे वक्त जैसे ठहर सा गया है. नई पीढ़ी के नए कैफे और रेस्टोरेंट के बीच ये पुरानी दुकानें दशकों से लोगों का भरोसा और अपना स्वाद कायम रखे हुए हैं. चोटीवाला से लेकर पंडित जी नाश्ते वाले तक, अग्रवाल नमकीन और हीरा लाल के छोले भटूरे तक ऋषिकेश की पुरानी यादें जुड़ी हुई हैं.
ऋषिकेश के राम झूला क्षेत्र में स्थित चोटीवाला आज भी शहर की पुरानी पहचान में शामिल है. करीब 67 साल पहले शुरू हुआ यह रेस्टोरेंट आज भी अपने सात्विक खाने और खास अंदाज के लिए जाना जाता है. यहां आने वाले कई लोग सिर्फ खाना खाने नहीं, बल्कि चोटीवाले बाबा की पहचान और इस जगह से जुड़ी पुरानी यादों को महसूस करने पहुंचते हैं. सालों से दुकान का नाम स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले पर्यटकों की जुबान पर बना हुआ है.
समय के साथ ऋषिकेश काफी बदल गया, बाजार बदले और खाने के नए ठिकाने भी खुल गए, लेकिन चोटीवाला अपनी जगह कायम रहा. यहां आज भी पुराना स्वाद और सादगी लोगों को खींच लाती है. कई परिवार ऐसे हैं जो सालों से यहां आते रहे हैं और अब अगली पीढ़ी भी उसी जगह खाना पसंद करती है. यही वजह है कि चोटीवाला सिर्फ एक रेस्टोरेंट नहीं, बल्कि ऋषिकेश की पुरानी खानपान संस्कृति का हिस्सा बन चुका है.
त्रिवेणी घाट बाजार में पंडित जी नाश्ते वाले की पहचान आज की नहीं है. इसकी शुरुआत 1940 में हुई थी और तब से यह दुकान ऋषिकेश के पुराने स्वाद को संभाले हुए है. उस दौर में जब शहर आज जितना बड़ा और व्यस्त नहीं था, तब से यहां नाश्ता करने वालों की आवाजाही बनी रही. दुकान से जुड़ी सबसे खास बात यही है कि समय बदलने के बावजूद लोगों का भरोसा और यहां मिलने वाले नाश्ते का स्वाद बरकरार रहा.
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आज त्रिवेणी घाट के आसपास कई नई दुकानें और कैफे नजर आते हैं, लेकिन पंडित जी नाश्ते वाले की अपनी अलग पहचान है. पुराने ग्राहक आज भी यहां पहुंचते हैं और कई लोग अपने बच्चों को भी इसी दुकान का स्वाद चखाने लाते हैं. करीब 86 साल पुरानी यह दुकान ऋषिकेश के बाजार की उन जगहों में है, जिनकी पहचान सिर्फ कारोबार से नहीं, बल्कि शहर की रोजमर्रा की जिंदगी और पुरानी यादों से भी जुड़ी है.
तिलक रोड पर स्थित अग्रवाल नमकीन करीब 57 साल से ऋषिकेश के लोगों की पसंद बना हुआ है. इसकी शुरुआत लगभग 1969 में हुई थी. इतने लंबे समय में शहर का बाजार काफी बदल चुका है, लेकिन नमकीन की इस दुकान ने अपनी पहचान बनाए रखी. स्थानीय लोगों के लिए यहां से नमकीन लेना सिर्फ खरीदारी नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की पुरानी आदत जैसा है. दुकान की पहचान धीरे-धीरे परिवारों और आसपास के बाजार से जुड़ती चली गई.
अग्रवाल नमकीन की खास बात यह है कि यहां पुराने ग्राहक आज भी नजर आते हैं. जिन लोगों ने कभी अपने परिवार के साथ यहां से सामान लिया था, वे अब अगली पीढ़ी के साथ पहुंचते हैं. यही सिलसिला किसी भी पुराने बाजार की दुकान को खास बनाता है. करीब छह दशक से ज्यादा पुरानी यह दुकान बताती है कि स्वाद और भरोसा लंबे समय तक लोगों को अपने साथ जोड़कर रख सकता है.
ऋषिकेश के हीरा लाल मार्ग पर स्थित एक पुरानी और जानी पहचानी दुकान है. करीब 54 साल पहले, यानी लगभग 1972 में शुरू हुई इस दुकान ने शहर के लोगों के बीच अपनी अलग जगह बनाई. चार दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी यहां के छोले भटूरे का नाम स्थानीय लोगों के बीच बना हुआ है. पुराने बाजार की गलियों में ऐसी दुकानें आज भी ऋषिकेश के खानपान की कहानी को आगे बढ़ा रही हैं.
शहर में आज खाने के लिए कई नए विकल्प मौजूद हैं, लेकिन पुरानी दुकानों की बात ही अलग होती है. हीरा लाल के छोले भटूरे पर आने वाले कई ग्राहक लंबे समय से यहां का स्वाद जानते हैं. कुछ लोग परिवार के साथ आते हैं तो कुछ पुराने दोस्तों के साथ. करीब 54 साल का सफर इस दुकान को सिर्फ एक खाने की जगह नहीं, बल्कि ऋषिकेश के बदलते बाजार के बीच अपनी पहचान बचाए रखने वाली पुरानी दुकान बनाता है.