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History Behind Dalchini Name : मसाले भोजन का स्वाद बढ़ा देते हैं. शुद्ध मसाले स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक हैं. ऐसा ही एक मसाला है दालचीनी जो कि पेड़ की छाल जैसा दिखता है. दालचीनी खाने का स्वाद तो बढ़ाती ही है, सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है. इसकी खुशबू और हल्की सी मिठास भोजन में स्वाद भर देती है. आयुर्वेद में इसे बेहद गुणकारी बताया गया है. आज दालचीनी आसानी से बाजार में मिल जाती है, लेकिन पुराने समय में इतनी बहुमूल्य थी कि चांदी से भी महंगी बिकती थी. दालचीनी को देखकर एक सवाल जरूर मन में आता अहि कि इसमें ना तो दाल है, और ना ही चीनी, फिर इस मसाले का नाम दालचीनी ही क्यों पड़ा? क्या है इसके पीछे की कहानी. असली-नकली दालचीनी में क्या अंतर होता है, इसके फायदे क्या हैं, आइये जानते हैं.
Why is Cinnamon Called Dalchini : दालचीनी एक गुणकारी मसाला है. दालचीनी का उपयोग भारतीय रसोई में स्वाद, सुगंध और औषधीय लाभ के लिए किया जाता है. यह एक सदाबहार पेड़ की छाल होती है. दालचीनी की खुशबू और हल्की सी मिठास बहुत खास है. यह भोजन में स्वाद भर देती है. दालचीनी एक औषधि भी है. आयुर्वेद में इसे बेहद गुणकारी बताया गया है. दिलचस्प बात यह है कि यह मसाला न तो दलहन परिवार से आता है और न ही चीनी की तरह मीठा होता है, फिर भी इसे दालचीनी कहते है. यानी ना तो इसमें दाल होती है और ना ही चीनी. फिर इसके नाम के पीछे की कहानी क्या है? इसका नाम दालचीनी कैसे पड़ा? असली-नकली दालचीनी में क्या फर्क होता है, इसका पानी पीने के क्या फायदे हैं, आइये जानते हैं.
दालचीनी में ना तो दाल है और ना ही चीनी, फिर इसका नाम ‘दालचीनी’ कैसे पड़ा? दरअसल दालचीनी का नाम फारसी और अरबी शब्द ‘दारचीनी’ (Dar-sini) से आया है. यह समय के साथ बदलकर हिंदी में ‘दालचीनी’ बन गया. पुरानी फारसी भाषा में ‘दार’ का अर्थ पेड़ या लकड़ी होता है. चीनी का संबंध चीन से हैं क्योंकि यह मसाला सबसे पहले चीन से होते हुए पश्चिमी देशों और भारत तक पहुंचा. इस तरह से
दारचीनी का मतलब है ‘चीन के पेड़ की लकड़ी या छाल’ था. आगे चलकर ‘दारचीनी’ बदलकर ‘दालचीनी’ हो गया. वैसे भी हमारे यहां चीन से लाई गई अधिकतर चीजों के नाम के आगे चीनी लगा दिया जाता है. इस तरह से डाल की छाल से निकलने और चीन से आने की वजह से इसका नाम दालचीनी पड़ा.
एक और दिलचस्प सच्चाई यह है कि दालचीनी की उत्पत्ति भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका (सीलोन) से हुई. वहीं से यह दक्षिण भारत, दक्षिण अमेरिका और वेस्टइंडीज तक पहुंची. एक वक्त ऐसा भी था जब दालचीनी इतनी बेशकीमती थी कि इसके लिए युद्ध लड़े जाते थे. इसे राजाओं और देवताओं के लिए बहुमूल्य उपहार भी माना जाता था. भारत के प्राचीन आयुर्वेद के ग्रंथों में दालचीनी का वर्णन नहीं है लेकिन प्राचीन आयुर्वेदाचार्यों ने इसे सामान्य मसाला ही माना. दालचीनी भी काली मिर्च जैसी ही गुणकारी है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर है. इसकी छाल में मौजूद सिनामाल्डिहाइड एक आवश्यक तेल है. सिनामाल्डिहाइड के कारण ही ये सभी गुण दालचीनी में पाए जाते हैं.
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अब जानते हैं कि असली या नकली दालचीनी की पहचान कैसे करें? ऐसे चार आसान तरीके हैं जिनसे आप जान सकते हैं कि दालचीनी असली है या नकली. सबसे पहले साबुत दालचीनी खरीदते समय उसका रंग देखें. सीलोन दालचीनी हल्के लाल-भूरे रंग की होती है. कैसिया दालचीनी का रंग अपेक्षाकृत गहरा हो सकता है. यह पहला संकेत है. इसके अलावा चिकनाई से पता लगाएं. असली दालचीनी की छाल ऊपर से काफी स्मूद यानी चिकनी होती है. असली दालचीनी अंदर से भरी रहती है मगर अमरूद और कैसिया की छाल से बनी नकली दालचीनी ऊपर से खुरदरी होने के साथ-साथ अंदर से खोखली होती है.
असली दालचीनी को सूंघने पर सोंधी खुशबू आती है. नकली दालचीनी में कोई सुगंध नहीं होती. इसी तरह असली दालचीनी चखने पर हल्की मिठास का अनुभव होता है. नकली दालचीनी का स्वाद फीका सा लगता है. असली दालचीनी पतली होती है. आसानी से टूट जाती है. वहीं नकली दालचीनी आसानी से नहीं टूटती. सीलोन दालचीनी की छाल कई बारीक परतों में लिपटी हुई दिखाई देती है. कैसिया की छाल आमतौर पर मोटी और सख्त होती है और उसमें इतनी पतली परतें नजर नहीं आतीं. इसके अलावा, सीलोन दालचीनी के पैकेट का लेबल जरूर पढ़ें. इसमें Ceylon Cinnamon या Cinnamomum verum लिखा होना चाहिए.
दालचीनी में औषधीय गुणों की भरमार होती है. यह बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण से बचाने में सहायक होती है. दालचीनी के नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है. ब्लड प्रेशर कंट्रोल के साथ-साथ यह कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करती है. दालचीनी दिल की बीमारियों से बचाती है. इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है. शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है. रोज सुबह खाली पेट दालचीनी के पानी का सेवन करने से डायबिटीज रोगियों को लाभ मिलता है. दालचीनी मेटाबॉलिज्म बढ़ाती है. इससे शरीर में वसा कम करने में मदद मिलती है. पेट रोगों के लिए भी दालचीनी रामबाण है. पेट रोगियों को सुबह खाली पेट हल्के गुनगुने पानी के साथ दालचीनी पाउडर का सेवन करना चाहिए. बस याद रखें कि इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर करें.