नई दिल्ली. अगर आप बड़े पर्दे पर हाई-वोल्टेज ड्रामा, खतरनाक गैंगस्टर अवतार और इमोशनल ट्विस्ट के फैन हैं, तो ‘टॉक्सिक’ आपको पसंद आ सकती है. ‘रॉकस्टार’ यश और डायरेक्टर गीतू मोहनदास का यह अनोखा कॉम्बिनेशन दर्शकों को क्राइम की ऐसी दुनिया में ले जाता है जहां गोलियों की आवाज गूंजती है और हर मोड़ पर साजिशों का जाल फैला होता है. यश के डबल अवतार, नयनतारा, कियारा आडवाणी और हुमा कुरैशी की शानदार एक्टिंग के साथ मिलकर फिल्म में जान डाल देता है.

कहानी
क्या होता है जब क्राइम की डरावनी दुनिया में बारूद के धुएं के बीच अचानक इमोशंस का तूफान आ जाता है? ‘टॉक्सिक’ सिर्फ गोलियों और हिंसा की कहानी नहीं है, बल्कि पावर, लॉयल्टी और रिश्तों का एक डार्क कॉकटेल है जो आपको हैरान कर देगा. कहानी ‘राया’ पर केंद्रित है, जिसने अपनी बेरहमी, जबरदस्त हिम्मत और पक्की लॉयल्टी से अंडरवर्ल्ड और इंटरनेशनल ड्रग एम्पायर में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. कहानी तब असली मोड़ लेती है जब उसका बेटा ‘टिकट’ इस खतरनाक रास्ते पर चल पड़ता है. टिकट की एंट्री से राया की पर्सनैलिटी का एक नया और अनएक्सपेक्टेड डायमेंशन सामने आता है. टिकट की मौजूदगी कहानी को सिर्फ एक टिपिकल मसाला एक्शन ड्रामा बनने से रोकती है और इसके बजाय इसमें फैमिली रिलेशनशिप, एक लव एंगल और बदले को शामिल किया गया है. गंगा (नयनतारा) और नादिया (कियारा आडवाणी) के किरदार कहानी में इमोशनल गहराई जोड़ते हैं, जिससे फिल्म और भी इंटेंस और खतरनाक हो जाती है.

एक्टिंग
इस फिल्म की सबसे बड़ी USP यश का डबल अवतार और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस है. मेकर्स ने उनकी बॉडी लैंग्वेज, व्यवहार और स्क्रीन प्रेजेंस को इतना अलग रखा है कि अंतर तुरंत पता चल जाता है. बाकी स्टार कास्ट की बात करें तो, नयनतारा ‘गंगा’ के किरदार में एक वाइब्रेंट इमोशनल एज लाती हैं. कियारा आडवाणी ‘नादिया’ के अपने रोल में मासूमियत और ग्रेस का एक अद्भुत टच लाती हैं. जब हुमा कुरैशी ‘एलिजाबेथ’ के रूप में स्क्रीन पर आती हैं, तो उनका नेगेटिव टोन और बॉडी लैंग्वेज पूरे फ्रेम पर छा जाते हैं. इस बीच, रुक्मिणी वसंत का ‘मेलिसा’ का किरदार दिल को छू जाता है, जिससे वह फिल्म की असली छिपी हुई हीरो बन जाती हैं. तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय, डेरेल डी’सिल्वा और सुदेव नायर भी अपने किरदारों को कहानी की पकड़ ढीली नहीं होने देते.

डायरेक्शन
गीतू मोहनदास का डायरेक्शन सीधी-सादी कहानी कहने से हटकर एक मल्टी-लेयर्ड स्ट्रक्चर दिखाता है. हर किरदार का अपना मकसद और बैकस्टोरी होती है, जिसे कहानी धीरे-धीरे मेन कहानी से जोड़ती है. किसी भी सस्पेंस या राज को तुरंत बताने के बजाय, मेकर्स ने सही समय पर जानकारी सामने लाने का तरीका अपनाया है. कहानी कहने के मामले में फिल्म शुरू से ही एक्शन मोड में जाने से बचती है. पहला हाफ राया के साम्राज्य, उसके रिश्तों और सपोर्टिंग किरदारों की नींव रखने में समय लेता है. गीतू मोहनदास ने शुरुआती बिल्ड-अप को ध्यान से रखा है और इंटरवल पर एक हाई-ऑक्टेन सीक्वेंस के साथ टोन को पूरी तरह से बदल दिया है. जैसे ही दूसरा हाफ शुरू होता है, एक्शन कोरियोग्राफी बढ़ती है, सीन की इंटेंसिटी दोगुनी हो जाती है और वायलेंस को काफी रॉ दिखाया जाता है.

म्यूजिक
फिल्म का टेक्निकल डिपार्टमेंट इसका सबसे मजबूत पिलर है और इसका बैकग्राउंड स्कोर इसकी रीढ़ की हड्डी साबित होता है. हर एक्शन सीक्वेंस और डार्क सीन के दौरान बजने वाला बैकग्राउंड म्यूजिक रोंगटे खड़े कर देने वाला है. गानों की जगह कहानी के फ्लो में रुकावट नहीं डालती, बल्कि इमोशनल सीन को और भी असरदार बनाती है. थिएटर में डॉल्बी एटमॉस के साथ साउंड डिजाइन, एक रियलिस्टिक अंडरवर्ल्ड फील देता है, हालांकि हिंदी बेल्ट के दर्शकों के लिए फिल्म के गाने जरूर निराश कर सकते हैं.

कमियां
लंबा रनटाइम: 194 मिनट की ड्यूरेशन कभी-कभी थोड़ी खिंची हुई और भारी लगती है.

धीमी शुरुआत: मेकर्स ने पहले हाफ में कैरेक्टर्स के बैकग्राउंड को बनाने में काफी समय लिया, जिससे रेगुलर एक्शन पसंद करने वालों के लिए शुरुआत थोड़ी धीमी हो सकती है.

बहुत ज्यादा वायलेंस: फिल्म में वायलेंस और खून-खराबा काफी ज्यादा है (रॉ वायलेंस), जो शायद सभी ऑडियंस या छोटे बच्चों के साथ देखने वालों के लिए आरामदायक न हो.

स्क्रिप्ट: फिल्म की स्क्रिप्ट भी थोड़ी उलझी हुई लगती है. हालांकि फिल्म के क्लाइमैक्स में इसकी मजबूती दिखाई पड़ती है.

अंतिम फैसला
‘टॉक्सिक’ सिर्फ गोलियों की बौछार नहीं है, बल्कि इमोशंस और गुस्से का एकदम सही बैलेंस है. अगर आपको सीट से उठ खड़े होने वाले शानदार विजुअल्स, धमाकेदार एक्शन और एक सॉलिड स्टोरीलाइन पसंद है, तो आप इस फिल्म को अपनी वॉचिंग लिस्ट में शामिल कर सकते हैं. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार.



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