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गाजीपुर में नेहरू स्टेडियम और पीजी कॉलेज के पास दो मशहूर समोसे की दुकानें हैं. नेहरू स्टेडियम परिसर की यह दुकान गाजीपुर के पुराने समोसे के स्वाद के लिए जानी जाती है. दुकान संचालक के मुताबिक यहां बनने वाला समोसा आजादी से पहले से चली आ रही परंपरा से जुड़ा है और आज भी पुराने ग्राहक इसका स्वाद लेने पहुंचते हैं , दुकान के मालिक बताते की 70 साल की उम्र की लोग भी कहते हैं कि हमसे भी पुरानी दुकान है.

नेहरू स्टेडियम परिसर की यह दुकान गाजीपुर के पुराने समोसे के स्वाद के लिए जानी जाती है. दुकान संचालक के मुताबिक यहां बनने वाला समोसा आजादी से पहले से चली आ रही परंपरा से जुड़ा है और आज भी पुराने ग्राहक इसका स्वाद लेने पहुंचते हैं , दुकान के मालिक बताते की 70 साल की उम्र की लोग भी कहते हैं कि हमसे भी पुरानी दुकान है.

बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों के बीच यह समोसा आज भी मात्र सात रुपये में उपलब्ध है.इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ बाजार के रेडीमेड मसालों का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता. दुकान संचालक खुद घर पर ही मसालों का खास मिश्रण तैयार करते हैं, जो इसकी गुणवत्ता को बरसों से बरकरार रखे हुए है.

यह दुकान सिर्फ युवाओं में ही लोकप्रिय नहीं है, बल्कि गाजीपुर के रिटायर्ड और उम्रदराज लोग भी इसके पुराने स्वाद के कायल हैं.कई स्थानीय नागरिकों के लिए यह समोसा महज एक नाश्ता नहीं, बल्कि शहर के बीते दौर और पुरानी यादों से जुड़ा है ,और जब आते है वही स्वाद याद आ जाता है जो 50 वर्ष पहले था .

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नेहरू स्टेडियम वाले इस समोसे का आकर्षण इसका संतुलित मसाला है.इसमें तीखेपन को कम रखा जाता है और शुद्ध खड़े मसालों का प्रयोग किया जाता है. यही सादगी भरा और पेट के अनुकूल स्वाद इसे दशकों से पुराने ग्राहकों की पहली पसंद बनाए हुए है.

गाजीपुर के पीजी कॉलेज के पास मिलने वाला यह समोसा अपने बिल्कुल जुदा और आधुनिक अंदाज के लिए शहरभर में मशहूर है. इसका ठेस पहुँचाता हुआ जायका और तीखे-चटपटे स्वाद का कॉम्बिनेशन कॉलेज के छात्र-छात्राओं और फूड लवर्स के बीच खासे चर्चा में रहता है. जितने भी ग्राहक कहते हैं बोलते हैं कि समोसा आलू से भरपूर रहता है.

इस समोसे की जान इसकी दमदार स्टफिंग है, जिसमें आलू के साथ कुरकुरी मूंगफली के दाने मिलाए जाते हैं। खाने वालों का मानना है कि समोसे के भीतर मिलने वाला यह मूंगफली का ट्विस्ट इसके टेक्सचर और स्वाद दोनों को अनोखा बना देता है. यहाँ भी मसाले संतुलित और कम तीखे रखे जाते हैं.

एक तरफ खड़े मसालों नेहरू स्टेडियम और पुराने तरीके से तैयार होने वाला समोसा, दूसरी तरफ आलू-मूंगफली की खास स्टफिंग वाला पीजी कॉलेज वाला स्वाद. गाजीपुर में दोनों की अपनी पहचान और अपने चाहने वाले हैं यानी समोसे के स्वाद की पसंद भी बिल्कुल व्यक्तिगत है.

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