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गाजियाबाद: गर्मी में ठंडी शिकंजी का स्वाद हर किसी को पसंद आता है, लेकिन अगर वही स्वाद बचपन की यादों से जुड़ा हो तो बात और खास हो जाती है. गाजियाबाद के नवयुग मार्केट में पिछले करीब 30 साल से एक दुकान लोगों को शिकंजी और बंटे वाली बोतल का स्वाद दे रही है. यहां शिकंजी का सफर 2.50 रुपये के गिलास से शुरू हुआ था, जो अब 30 रुपये तक पहुंच चुका है. इसके बावजूद पुराने स्वाद का आकर्षण आज भी बरकरार है.
गाजियाबाद: तेज गर्मी में सड़क किनारे ठंडी शिकंजी का एक गिलास मिल जाए तो राहत महसूस होती है. अगर इसके साथ बंटे वाली बोतल का स्वाद मिल जाए, तो गर्मी के साथ बचपन की यादें भी ताजा हो जाती हैं. गाजियाबाद के नवयुग मार्केट में एक ऐसी ही दुकान पिछले करीब 30 साल से लोगों को शिकंजी और बंटे वाली बोतल का स्वाद दे रही है. समय के साथ शहर बदला, बाजार का विस्तार हुआ और चीजों की कीमतें भी बढ़ीं, लेकिन इस दुकान की शिकंजी का स्वाद आज भी लोगों को अपनी ओर खींचता है.
दुकान संचालक विनोद कुमार बताते हैं कि उन्होंने करीब 30 साल पहले शिकंजी बेचने का काम शुरू किया था. उस समय नवयुग मार्केट के आसपास आज जैसी भीड़ और बसावट नहीं थी. दुकान के पास एक स्कूल हुआ करता था, जो आज भी मौजूद है.
विनोद बताते हैं कि शुरुआत के दिनों में शिकंजी का एक गिलास महज 2.50 रुपये में मिलता था, जबकि बंटे वाली बोतल की कीमत सिर्फ 1 रुपये थी. समय के साथ शहर बढ़ा और महंगाई के साथ शिकंजी की कीमत भी बढ़ती गई. आज उनकी दुकान पर एक गिलास शिकंजी 30 रुपये और बंटे वाली बोतल 10 रुपये में मिलती है.
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विनोद कुमार के लिए यह दुकान सिर्फ कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि उनके परिवार की जिंदगी का सहारा भी है. उनका कहना है कि इसी काम की कमाई से उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण किया. पत्नी और दो बच्चों वाले परिवार में बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के दूसरे खर्च भी इसी दुकान की कमाई से पूरे होते हैं. उनकी पत्नी भी दुकान के काम में उनका हाथ बंटाती हैं. करीब तीन दशक से एक ही काम करते हुए विनोद ने इस दुकान को अपनी रोजी-रोटी के साथ एक पहचान भी बना लिया है.
विनोद बताते हैं कि गर्मियों में शिकंजी की मांग पहले भी रहती थी और आज भी इसका क्रेज कम नहीं हुआ है. ठंडी शिकंजी गर्मी में लोगों को राहत देती है, इसलिए आसपास के लोग ही नहीं, बल्कि गाजियाबाद के दूर-दराज इलाकों से भी लोग यहां पहुंचते हैं.
दुकान के पास मौजूद स्कूल के बच्चे भी इस स्वाद से परिचित हैं. सुबह और दोपहर के समय बच्चे अक्सर शिकंजी और बंटे वाली बोतल लेने पहुंचते हैं. उनके लिए यह सिर्फ गर्मी से राहत देने वाला पेय नहीं, बल्कि पुराने स्वाद से जुड़ा एक छोटा सा अनुभव भी है.
तीन दशक पहले जिस दुकान पर ढाई रुपये का शिकंजी का गिलास मिलता था, आज उसी के लिए लोगों को 30 रुपये चुकाने पड़ते हैं. बंटे वाली बोतल भी एक रुपये से बढ़कर 10 रुपये की हो गई है. शहर और बाजार भले ही बदल गए हों, लेकिन विनोद की दुकान पर आज भी शिकंजी के गिलास और बंटे वाली बोतल का वही पुराना आकर्षण बरकरार है. यही वजह है कि यहां आने वाले कई लोगों के लिए यह दुकान सिर्फ स्ट्रीट फूड का ठिकाना नहीं, बल्कि पुराने दिनों और बचपन की यादों से जुड़ी जगह बन चुकी है.