बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर बंगाल की सियासत गरमा गई है। दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री बंगाल में तीन दिन की कथा के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान बंगाल में नौ दिन नॉनवेज की दुकानें बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दुर्गा और मुर्गा साथ-साथ नहीं चलेगा। बाबा बागेश्वर ने कहा कि हो सके तो बलि प्रथा को भी सिंबोलिक किया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल दौरे के बाद उनका ये बयान चर्चा में आ गया है।
हावड़ा जिले के लिलुआ में 4, 5 और 6 सितंबर को आयोजित तीन दिवसीय हनुमान कथा और दिव्य दरबार में हजारों श्रद्धालु पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान दुर्गापूजा और मांसाहार को लेकर दिए गए उनके बयान पर अब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
मांसाहारी दुकानें की जानी चाहिए बंद
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दुर्गापूजा के दौरान मांसाहार से परहेज करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुर्गापूजा के नौ दिनों तक मटन जैसी मांसाहारी चीजों की दुकानें बंद होनी चाहिए। उन्होंने पूजा मंडपों के आसपास नॉन-वेज खाने की बिक्री पर रोक लगाने और हिंदुओं से नवरात्रि के दौरान शाकाहारी भोजन करने की अपील भी की।
‘मांस खाने वाले पाखंडी’, बयान पर विवाद
धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गापूजा के दौरान मांसाहारी भोजन करने वाले हिंदुओं को ‘पाखंडी’ बताया। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। आलोचकों का कहना है कि बंगाल में दुर्गापूजा के दौरान मांसाहारी भोजन की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है और ऐसे में इस तरह की टिप्पणी लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को आहत कर सकती है। हालांकि, अभी तक इस बयान को लेकर सड़कों पर किसी बड़े प्रत्यक्ष विरोध की बात सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।
बंगाल में नवमी के दिन मटन खाने की परंपरा- BJP प्रदेश अध्यक्ष
पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल में नवमी के दिन मटन खाने की परंपरा है। इसे बदलने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी संत अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र है।
बंगाल की जनता सब देख रही- टीएमसी विधायक कुणाल घोष
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले पर बंगाल की जनता सब देख रही है। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि दूसरे राज्य से आकर बंगालियों का अपमान किया जा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री और पूरी कैबिनेट ऐसे लोगों को आमंत्रित कर उनका स्वागत कर रही है। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगालियों का अपमान बीजेपी के लिए किया जा रहा है।
बंगाल में दुर्गापूजा की परंपरा पर छिड़ी बहस
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा से जुड़ी धार्मिक आस्था और स्थानीय खान-पान की परंपराओं को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ संत के बयान को धार्मिक अपील के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दलों और आलोचकों का कहना है कि बंगाल की सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर किसी तरह की टिप्पणी करने से पहले स्थानीय भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
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