होमफोटोलाइफ़फूड

प्रोटीन से भरपूर थे गांव के ये 5 पारंपरिक खाद्य पदार्थ, आज भी बेहद फायदेमंद

Last Updated:

Protein Rich Traditional Food: गांव के 5 पारंपरिक प्रोटीन से भरपूर फूड्स आपकी इम्यूनिटी और मसल्स को मजबूत बनाएंगे. इन्हें अपनी डाइट में शामिल कर आप तगड़े फायदे पा सकते हैं. ये फूड्स ना केवल पौष्टिक हैं, बल्कि आसानी से उपलब्ध भी हैं. अपनी सेहत को बेहतर बनाने के लिए आज ही इन्हें अपनाएं और देखें कैसे ये आपकी ऊर्जा और ताकत बढ़ाते हैं.

Protein Rich Traditional Food: आज के दौर में प्रोटीन सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले पोषक तत्वों में से एक है. बाजार में प्रोटीन बार, शेक और फोर्टिफाइड स्नैक्स की भरमार है. लेकिन इन चीजों के चलन में आने से बहुत पहले ही भारतीय गांवों की किचन में ऐसे कई पारंपरिक खाद्य पदार्थ मौजूद थे, जो शरीर को प्राकृतिक रूप से प्रोटीन उपलब्ध कराते थे. स्वस्थ वयस्कों के लिए आमतौर पर शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम करीब 0.8 ग्राम प्रोटीन की जरूरत बताई जाती है. हालांकि, उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के अनुसार यह मात्रा अलग-अलग हो सकती है. खास बात यह है कि गांवों में खाए जाने वाले कई खाद्य पदार्थ सस्ते, स्थानीय और आसानी से उपलब्ध होने के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर थे. आइए जानते हैं ऐसे ही 5 पारंपरिक खाद्य पदार्थों के बारे में.

सत्तू – प्रोटीन पाउडर के जमाने से बहुत पहले भारतीय घरों में सत्तू का इस्तेमाल होता था. भुने हुए चने को पीसकर तैयार किया जाने वाला सत्तू बेहद पौष्टिक और पेट भरने वाला माना जाता है. इसे पानी, नमक और नींबू के साथ घोलकर पिया जाता था. इसके अलावा सत्तू से पराठे और कई तरह के पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं. गर्मियों में सत्तू का शरबत आज भी कई इलाकों में लोकप्रिय है.

भुना चना – भुना चना गांवों का ऐसा नाश्ता था, जिसे खेतों में काम करने वाले लोग आसानी से अपने साथ ले जाते थे. इसे पकाने की जरूरत नहीं होती थी और थोड़ी मात्रा में खाने पर भी पेट भरा हुआ महसूस होता था. सस्ता और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भुना चना ग्रामीण लाइफस्टाइल का बेहद व्यावहारिक हिस्सा था. आज भी यह पौष्टिक शाकाहारी स्नैक्स में शामिल किया जाता है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

अंकुरित मूंग – पुराने समय के किचन में अंकुरित मूंग भी खूब खाई जाती थी. मूंग को भिगोकर अंकुरित किया जाता था और फिर इसे सलाद के रूप में या हल्के मसालों के साथ खाया जाता था. इसमें प्याज, नींबू और हरी मिर्च मिलाकर इसका स्वाद और भी बढ़ाया जाता है. यह हल्का होने के साथ-साथ प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है.

मूंगफली – मूंगफली भले ही दिखने में साधारण हो, लेकिन ग्रामीण खान-पान में इसका खास महत्व रहा है. इसे भूनकर या उबालकर खाया जाता था. इसके अलावा मूंगफली की चटनी और गुड़ के साथ बनी पारंपरिक मिठाइयां भी खूब पसंद की जाती थीं. मूंगफली में प्रोटीन के साथ स्वस्थ वसा भी पाई जाती है, जिसके कारण यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकती है.

मूंग दाल का चीला – मूंग दाल का चीला आज भी पारंपरिक और पौष्टिक नाश्ते के तौर पर पसंद किया जाता है. भीगी हुई मूंग दाल को पीसकर उसका घोल तैयार किया जाता है और फिर तवे पर चीला बनाया जाता है. इसमें प्याज, हरी मिर्च, धनिया और अन्य सब्जियां भी मिलाई जा सकती हैं. स्वादिष्ट होने के साथ यह प्रोटीन युक्त और पेट भरने वाला नाश्ता है.

इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों की खासियत केवल उनका प्रोटीन होना नहीं है. ये स्थानीय, किफायती और आसानी से उपलब्ध होते थे. यानी पोषण के लिए हमेशा महंगे और पैकेज्ड उत्पादों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं थी. भारतीय गांवों की पारंपरिक रसोई ने रोजमर्रा के खान-पान में ही ऐसे कई विकल्प शामिल कर रखे थे, जो स्वाद के साथ शरीर को जरूरी पोषण भी देते थे.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

Write A Comment