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Ghazipur News: गाजीपुर के रोजा इलाके में महज 8×8 फीट के कमरे में पिछले 15 साल से चाट का कारोबार चल रहा है. एसी लगे इस छोटे से बेसमेंट में एक बार में करीब 15 लोग बैठकर दही फुलकी, दही बड़ा, टिक्की और टमाटर चाट का स्वाद लेते हैं. दुकान की खासियत घर पर तैयार किए गए खड़े मसालों का स्वाद है.

गाजीपुर: चाट और फुलकी के शौकीनों के लिए गाजीपुर में कई पुरानी दुकानें हैं, जो अपने स्वाद के लिए पहचानी जाती हैं. लेकिन रौजा इलाके की एक दुकान अपने स्वाद के साथ-साथ अपने अनोखे सेटअप के कारण भी चर्चा में है. सड़क किनारे खुली बड़ी दुकानें तो आपने खूब देखी होंगी, लेकिन यहां महज 8×10 फीट के कमरे में एक बार में करीब 15 लोग बैठकर आराम से दही फुलकी, दही बड़ा और चाट का स्वाद लेते हैं.

दुकान का कमरा देखने में किसी छोटे स्टूडियो के सेटअप जैसा लगता है. तीन तरफ सोफे लगे हैं, दो आमने-सामने और एक बीच में. जगह सीमित है, लेकिन बैठने की व्यवस्था ऐसी है कि ग्राहक आराम से बैठकर खाना खा सकते हैं. एक बैच के 15 लोग जैसे ही उठते हैं, बाहर इंतजार कर रहे दूसरे ग्राहक अंदर बैठ जाते हैं. दुकान के बाहर अक्सर लोगों की भीड़ इसी इंतजार में दिखाई देती है कि अंदर की सीट कब खाली होगी.

गर्मी से बचाने के लिए बेसमेंट में लगाया एसी
दुकान के संचालक विजय कुमार मोदनवाल बताते हैं कि उन्हें यह कारोबार करते हुए करीब 15 साल हो चुके हैं. उनके अनुसार, शुरुआत में ग्राहक दही फुलकी और दही बड़े का स्वाद लेने आते थे, लेकिन जगह कम होने के कारण कई लोग आधा खाकर ही चले जाते थे. गर्मी के मौसम में बैठने की परेशानी और बढ़ जाती थी.

विजय कुमार बताते हैं कि लोगों की डिमांड हम पहले से देखते आ रहे थे. ग्राहक चाहते थे कि बैठकर आराम से खा सकें. इसी को ध्यान में रखते हुए हमने छोटे से बेसमेंट में एसी लगवाया. अब लोग आराम से बैठते हैं और दही फुलकी, दही बड़ा, टिक्की और टमाटर चाट का आनंद लेते हैं. उनका कहना है, हम खड़े मसाले का इस्तेमाल करते हैं. बाजार से कोई तैयार पिसा हुआ मसाला नहीं लेते. मसालों को खुद पीसते हैं और अपने हिसाब से रेसिपी तैयार करते हैं, यही हमारे स्वाद की खासियत है.

बाहर इंतजार करते हैं ग्राहक
दुकान की सबसे दिलचस्प तस्वीर तब सामने आती है, जब अंदर सभी सीटें भर जाती हैं. छोटे से कमरे में करीब 15 लोग बैठते हैं और बाहर कई ग्राहक अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई देते हैं. जैसे ही अंदर बैठे लोग खाना खत्म करके बाहर निकलते हैं, बाहर खड़े ग्राहक तुरंत अंदर पहुंच जाते हैं. यह नजारा बताता है कि कारोबार के लिए हमेशा बड़ी दुकान या बड़ा बजट जरूरी नहीं होता. सीमित जगह, साफ-सुथरी व्यवस्था, आरामदायक माहौल और अपने स्वाद पर भरोसा हो तो छोटा-सा कमरा भी ग्राहकों के बीच बड़ी पहचान बना सकता है. रौजा की यह दुकान इसी बात की मिसाल है कि जगह भले 8×10 फीट हो, लेकिन स्वाद और ग्राहकों का भरोसा उससे कहीं बड़ा है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…

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