कोलकाताः पश्चिम बंगाल में 232 अवैध मदरसों को तुरंत बंद करने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही 100 मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू ने कहा कि जिला प्रशासन के तरफ से राज्य के मदरसों की जांच की गई है। 22 जिला और कोलकाता के अलग अलग इलाकों में मदरसों की प्रबंध, शिक्षक, छात्रा, बुनियादी ढांचा, वित्तपोषण के स्रोत समेत सभी इन्फॉर्मेशन लिया है। 2,132 मदरसे सही मंज़ूरी के साथ चल रहे हैं। 2,396 मदरसे बिना किसी सरकारी बोर्ड या ज़रूरी संस्थान के बिना इजाजत से ही चलाए जा रहे हैं। 

100 मदरसों को कारण बताओ नोटिस

मंत्री ने कहा कि इकट्ठा की गई जानकारी को वेरिफ़ाई करने के लिए राज्य से एक स्पेशल टीम भी भेजी गई थी। वेरिफ़िकेशन के नतीजों के आधार पर पहले फेज में मदरसा डायरेक्टरेट के 232 मदरसों को तुरंत बंद करने और काम न करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, कुल 100 मदरसों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं, जिन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया है। अगर वे यह साबित करने में नाकाम रहते हैं कि वे कानूनी और बिना इजाज़त के हैं, तो इन संस्थानों को सही प्रोसेस के ज़रिए बंद कर दिया जाएगा।

मालदा में सबसे ज्यादा मदरसे बंद

मदरसा शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, बंद होने वाले मदरसों की लिस्ट में मालदा सबसे आगे है, जहां लगभग 44-45 मदरसे बंद हुए हैं। इसके बाद नॉर्थ दिनाजपुर है जहां करीब 37-38 मदरसे बंद हुए, फिर साउथ 24 परगना में लगभग 32 और मुर्शिदाबाद व नादिया में करीब 25-25 मदरसे बंद हुए। यह कार्रवाई ज़िला प्रशासन द्वारा सभी मदरसों की ज़मीनी जांच के बाद की गई।

जांच में सिलेबस से अलग हटकर पढ़ाई और क्लासरूम में जगह की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आईं। सभी 22 ज़िलों और कोलकाता इलाके के मजिस्ट्रेटों ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में चल रहे मदरसों पर रिपोर्ट सौंपी। रजिस्ट्रेशन की स्थिति, मैनेजमेंट, छात्रों के एनरोलमेंट और पहचान, टीचिंग स्टाफ़, इंफ़्रास्ट्रक्चर और फ़ंडिंग के स्रोतों से जुड़ी विस्तृत जानकारी इकट्ठा की गई और उसकी जांच-पड़ताल की गई। डीएम ने रिपोर्ट दी कि लगभग 2,132 मदरसे सही रजिस्ट्रेशन/एफ़िलिएशन आदि के साथ चल रहे थे, जबकि 2,396 मदरसे किसी भी सरकार या बोर्ड से ज़रूरी रजिस्ट्रेशन/एफ़िलिएशन के बिना चल रहे थे।

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