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Bharatpur Famous Dahi Gujia: भरतपुर की ‘दही की गुजिया’ गर्मियों के मौसम में स्वाद और सेहत का एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरी है. दाल से तैयार और ठंडी दही में डूबी यह गुजिया अपने खट्टे-मीठे जायके के लिए मशहूर है. इसे बनाने में दाल का उपयोग किया जाता है जो प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, जबकि दही शरीर को ठंडक और पाचन शक्ति प्रदान करती है. भरतपुर के बाजारों में बढ़ते तापमान के साथ इस पारंपरिक व्यंजन की मांग तेजी से बढ़ गई है.

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Bharatpur Famous Dahi Gujia: राजस्थान के भरतपुर जिले में जैसे ही गर्मियों का आगाज होता है, यहाँ के पारंपरिक खान-पान की रौनक देखते ही बनती है. चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के बीच भरतपुर की खास पहचान बन चुकी ‘दही की गुजिया’ एक बार फिर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है. ठंडी तासीर और बेहतरीन जायके के कारण यह व्यंजन न केवल स्थानीय निवासियों, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों की भी पहली पसंद बन चुका है. दही की गुजिया विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में ही तैयार की जाती है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखती है.

दही की गुजिया बनाने की प्रक्रिया काफी दिलचस्प और पारंपरिक है. इसे मूंग या उड़द की दाल के पेस्ट से तैयार किया जाता है. दाल से बनी इन गुजियाओं को पहले हल्का तला जाता है और फिर उन्हें पानी में भिगोकर नरम किया जाता है. इसके बाद इन्हें गाढ़ी, ठंडी और फेंटी हुई दही में डुबोकर परोसा जाता है. स्वाद को दोगुना करने के लिए ऊपर से भुना हुआ जीरा, काला नमक, लाल मिर्च, मीठी-खट्टी सोंठ की चटनी और हरा धनिया डाला जाता है. इसका एक साथ मीठा, खट्टा और हल्का नमकीन स्वाद इसे अन्य व्यंजनों से बिल्कुल अलग और खास बना देता है.

सेहत का खजाना: पाचन और ऊर्जा का स्रोत
दही की गुजिया केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी फायदेमंद मानी जाती है. दही शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक प्रदान करती है और पाचन तंत्र (Digestive System) को मजबूत बनाती है. वहीं, दाल से बनी गुजिया प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत होती है, जो शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करती है. गर्मियों में जब शरीर को हल्का और सुपाच्य भोजन चाहिए होता है, तब यह व्यंजन एक संतुलित आहार के रूप में उभरता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यंजन न केवल पेट भरता है, बल्कि मन को भी शांति देता है.

सांस्कृतिक पहचान और बढ़ती मांग
भरतपुर के बाजारों में सुबह से लेकर शाम तक दही की गुजिया की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा सकती है. कई लोग तो इसे अपने दैनिक आहार का हिस्सा बना चुके हैं. स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, जैसे-जैसे पारा चढ़ता है, इस व्यंजन की बिक्री में कई गुना इजाफा हो जाता है. वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी भरतपुर की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है. आधुनिक फास्ट फूड के दौर में भी दही की गुजिया ने अपनी साख और स्वाद को बरकरार रखा है, जो हर किसी को अपनी ओर खींचने में सफल साबित हो रही है.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें



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