‘हरि हर वीरा मल्लू: पार्ट 1- स्वॉर्ड वर्सेज स्पिरिट’ हमें 17वीं सदी के मुगल साम्राज्य के उथल-पुथल भरे दौर में ले जाती है, विशेष रूप से 1684 के समय में जब छत्रपति शिवाजी के निधन के चार साल बाद भी औरंगजेब (बॉबी देओल) का अत्याचार और हिंदुओं पर लगा जजिया कर चरम पर था. इसी पृष्ठभूमि में, वीरा मल्लू (पवन कल्याण) नामक एक काल्पनिक विद्रोही नायक उभरता है. उसका मिशन स्पष्ट है: सनातन धर्म की रक्षा करना और मुगलों के चंगुल से एक शहर को आजाद कराने के लिए प्रतिष्ठित कोहिनूर हीरा चुराना.
यह फिल्म मुगल शासकों के कथित महिमामंडन को चुनौती देती है और भारत के गुमनाम नायकों के लचीलेपन और देश की संपदा की लूटपाट को उजागर करती है. ‘हरि हर वीरा मल्लू’ एक बड़े पैमाने की पीरियड एक्शन-एडवेंचर है, जो भव्यता के साथ एक सशक्त संदेश देने की कोशिश करती है. महामारी और पवन कल्याण की राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण लंबे समय तक अटकी रही यह फिल्म अब आखिरकार दर्शकों के सामने आ चुकी है.
पवन कल्याण ने शीर्षक भूमिका में फिल्म का पूरा भार संभाला है. उनका अभिनय शक्ति और दृढ़ता का एक बेहतरीन मिश्रण है, जो अपने लोगों और आस्था के लिए लड़ने वाले एक योद्धा की आत्मा को दर्शाता है. 18 मिनट के क्लाइमैक्स सीक्वेंस में उनकी मार्शल आर्ट विशेषज्ञता स्पष्ट रूप से दिखती है, जिसे उन्होंने खुद कोरियोग्राफ किया है. बॉबी देओल ने क्रूर सम्राट औरंगजेब के रूप में एक सराहनीय प्रदर्शन दिया है, हालांकि उनके किरदार को और अधिक गहराई दी जा सकती थी. निधि अग्रवाल, नरगिस फाखरी, नोरा फतेही और सत्याराज जैसे सहायक कलाकारों ने अच्छा समर्थन दिया है, भले ही कुछ किरदार पूरी तरह से विकसित न हो पाए हों.
निर्देशक कृष जगरलामुडी और एएम ज्योति कृष्णा, पटकथा लेखक साई माधव बुर्रा के साथ मिलकर एक महाकाव्य कथा बुनने का प्रयास करते हैं. फिल्म में चोरी, विद्रोह और ऐतिहासिक दमन पर टिप्पणी का सफल मेल है. हालांकि, कहानी कहने में कुछ जगहों पर बिखराव है, खासकर दूसरे भाग में, जिससे गति थोड़ी धीमी पड़ जाती है. औरंगजेब के क्रूर शासन और जजिया कर से जुड़े दृश्य दर्शकों को भावुक कर सकते हैं. सनातन धर्म और आध्यात्मिक प्रतिरोध पर फिल्म का जोर इसे अन्य ऐतिहासिक एक्शन फिल्मों से अलग बनाता है. फिल्म की तकनीकी भव्यता सराहनीय है.
एमएम कीरवानी का संगीत इसकी सबसे बड़ी ताकत है. उनका स्कोर फिल्म के भावनात्मक और नाटकीय पलों को ऊंचाइयों तक ले जाता है, खासकर ‘असुर हननम’ जैसे गीतों में यह महसूस होता है. ज्ञाना शेखर वीएस और मनोज परमहंस की सिनेमैटोग्राफी मुगल युग के शानदार सेटों और विशाल परिदृश्यों को बेहद खूबसूरती से कैप्चर करती है, जिन्हें प्रोडक्शन डिजाइनर थोटा थरानी ने बारीकी से रीक्रिएट किया है. वीएफएक्स, जिसकी देखरेख बेन लॉक (जिन्होंने एक्वामैन और स्टार वार्स: द फोर्स अवेकेंस में काम किया है) ने की है, भव्य दृश्यों को और निखारता है, हालांकि कुछ दृश्यों में सीजीआई की गुणवत्ता में थोड़ी कमी महसूस हो सकती है.
निक पॉवेल, राम-लक्ष्मण और पीटर हेन की टीम द्वारा कोरियोग्राफ किए गए एक्शन सीक्वेंस फिल्म का मुख्य आकर्षण हैं, जो दर्शकों को रोमांच से भर देते हैं. ‘हरि हर वीरा मल्लू’ जुल्म के खिलाफ प्रतिरोध के मार्मिक विषयों को छूती है, जिसमें औरंगजेब के अत्याचार और जजिया कर के क्रूर प्रभाव को उजागर किया गया है. फिल्म भारतीय नायकों का गुणगान करती है और मुगलों के ऐतिहासिक महिमामंडन की आलोचना करती है, जिसका उद्देश्य भारत की मूल प्रतिरोध कहानियों और कोहिनूर जैसे धन की लूट को सामने लाना है. पवन कल्याण की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता, जिसमें उन्होंने अपने पारिश्रमिक का एक हिस्सा लौटाया और ऐतिहासिक सटीकता की वकालत की, इन विषयगत इरादों को और पुष्ट करती है. ‘हरि हर वीरा मल्लू’ पवन कल्याण की दमदार उपस्थिति, एक शक्तिशाली संगीत स्कोर और प्रभावशाली प्रोडक्शन डिजाइन से सजी एक भव्य और एक्शन से भरपूर पीरियड ड्रामा है.
भले ही इसकी महत्वाकांक्षी कहानी में कहीं-कहीं उतार-चढ़ाव आएं, फिल्म रोमांचक एक्शन दृश्यों और सांस्कृतिक व आध्यात्मिक प्रतिरोध के मजबूत संदेश को सफलतापूर्वक प्रस्तुत करती है. यह फिल्म अपनी बहुप्रतीक्षित अगली कड़ी के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है और इसकी सफलता निश्चित रूप से इस महाकाव्य गाथा के भविष्य को प्रभावित करेगी. इस फिल्म को आप अपने पूरे परिवार के साथ सिनेमाघरों में जाकर देख सकते हैं. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 3 स्टार.