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Nikita Roy Movie Review: शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे और सोनाक्षी सिन्हा के भाई कुश सिन्हा ने फिल्म ‘निकिता रॉय’ से निर्देशन में कदम रखा है. इस फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा मुख्य भूमिका में हैं, जो एक सुपरनैचुरल थ्रिलर फिल्म है. यह फिल्म आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है.

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फिल्म ‘निकिता रॉय’ 18 जुलाई 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है.

निकिता रॉय 3

18 जुलाई 2025|हिंदी116 मिनट|सुपरनैचुरल थ्रिलर

Starring: सोनाक्षी सिन्हा, परेश रावल, अर्जुन रामपाल, सुहैल नैयर और अन्यDirector: कुश सिन्हाMusic: अभिनव शेखर

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लंबे समय बाद सोनाक्षी सिन्हा की कोई फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई है, जिसका नाम है ‘निकिता रॉय’. इससे पहले वह 2024 में आई फिल्म ‘बड़े मियां छोटे मियां’ में एक छोटे से किरदार में नजर आई थीं. इस फिल्म का निर्देशन उनके भाई कुश सिन्हा ने किया है, जो उनकी पहली निर्देशित फिल्म है. यह एक सुपरनैचुरल थ्रिलर फिल्म है, जिसमें हॉरर के साथ-साथ सस्पेंस भी है. ‘तर्क बनाम विश्वास’, ‘सत्य बनाम भ्रम’ और ‘डर बनाम साहस’- ये सिर्फ मुहावरे नहीं, बल्कि फिल्म ‘निकिता रॉय’ का सार हैं.

‘निकिता रॉय’ एक मशहूर लेखिका और पत्रकार निकिता (सोनाक्षी सिन्हा) की कहानी है जो ढोंगी बाबाओं और अंधविश्वासों के खिलाफ लिखती है. उसके लिए हर सवाल का जवाब विज्ञान और तर्क में छिपा है, लेकिन जब उसके भाई की लंदन में रहस्यमयी मौत हो जाती है, तो उसका विश्वास डगमगाने लगता है. इस मौत का सच जानने की कोशिश में वह एक ऐसी दुनिया में उलझ जाती है जिससे वह हमेशा के लिए दोस्ती कर लेती है. कहानी आपको बताती है कि जब आपका दर्द बहुत गहरा हो जाता है, तो हमारे सिद्धांत भी बेकार हो जाते हैं.

सोनाक्षी सिन्हा इस फिल्म में अपने करियर की सबसे गंभीर भूमिका निभा रही हैं. उनका चेहरा, उनकी आंखों का दर्द और उनकी आवाज की गहराई… सब कुछ किरदार में नई जान डाल देता है. ‘निकिता’ के रूप में वह अपनी खूबियों और कमजोरियों, दोनों को बखूबी जीती हैं. उनके पूर्व साथी का किरदार निभा रहे सुहैल नय्यर एक शांत और संयमित किरदार में हैं. शुरुआत में वह भले ही हल्के लगें, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, उनकी मौजूदगी कहानी में एक नया मोड़ लाती है.

परेश रावल एक आध्यात्मिक गुरु अमरदेव की भूमिका में हैं, जिनके चेहरे की शांति के पीछे छिपा अंधेरा फिल्म का सबसे डरावना हिस्सा है. उनकी आंखें बोलती हैं, और उनकी खामोशी डरावनी है. उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह किसी भी किरदार में गहराई ला सकते हैं. अर्जुन रामपाल के पास स्क्रीन पर सीमित समय है, लेकिन शुरुआती दृश्य में उनका अभिनय दर्शकों को खींचता है और फिल्म का माहौल बनाता है. कुश सिन्हा का निर्देशन बेहद परिपक्व है, खासकर क्योंकि यह उनकी पहली फिल्म है. उन्होंने हॉरर को सिर्फ डरावने चेहरों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि मनोवैज्ञानिक डर, अकेलेपन और मानसिक अस्थिरता के जरिए डर का एक नया रूप दिखाया है.

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी में अंधेरे और उजाले के खेल के जरिए ऐसा माहौल बनाया गया है जो दर्शक को असहज भी करता है और बांधे भी रखता है. बैकग्राउंड स्कोर ज्यदा जोरदार नहीं है, लेकिन जब बजता है तो असरदार है. निकिता रॉय सिर्फ एक थ्रिलर नहीं है, यह एक भावनात्मक और सामाजिक युद्ध की कहानी है जो दिल को गहराई से छूती है. कुश सिन्हा की यह पहली फिल्म दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब हकीकत और भ्रम के बीच की दीवार गिर जाती है, तो इंसान क्या चुनता है. अगर आप सस्पेंस, थ्रिलर और दमदार अभिनय से भरपूर फिल्म देखना चाहते हैं तो निकिता रॉय सिनेमाघरों में आपकी वेटिंग लिस्ट में जरूर होनी चाहिए. मेरी ओर से फिल्म को 5 से 3 स्टार.

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Pratik Shekhar

Pratik Shekhar is leading the entertainment section in News18 Hindi. He has been working in digital media for the last 12 years. After studying from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Co…और पढ़ें



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