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Aankhon Ki Gustaakhiyan Movie Review: बॉलीवुड एक्टर संजय कपूर की बेटी शनाया कपूर ने फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया है. इस फिल्म में वह विक्रांत मैसी के साथ नजर आ रही हैं. तो चलिए, आपको बताते हैं कैसी है फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’?

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11 जुलाई 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’.

आंखों की गुस्ताखियां 3

11 जुलाई 2025|हिंदी140.46 मिनट|रोमांटिक ड्रामा

Starring: विक्रांत मैसी, शनाया कपूर, जैन खान दुर्रानी और अन्यDirector: संतोष सिंहMusic: विशाल मिश्रा

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’12th Fail’ के बाद विक्रांत मैसी के अभिनय में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला. उसके बाद उनकी फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ को भी खूब सराहा गया. अब फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’ में उन्होंने एक ऐसा किरदार निभाया जो उनके अब तक के सभी किरदारों से अलग है. इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे लड़के का किरदार निभाया है जो देख नहीं सकता. इस फिल्म के जरिए संजय कपूर की बेटी शनाया कपूर ने बॉलीवुड में एंट्री की है. ‘आंखों की गुस्ताखियां’ को प्रोड्यूस किया है मानसी बागला और वरुण बागला ने, जो ओपन विंडो फिल्म्स और जी स्टूडियोज के साथ मिलकर ऐसी कहानियों को पर्दे पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, जो दिल से जुड़ती हैं. तो चलिए, आपको बताते हैं कैसी है शनाया कपूर की डेब्यू फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’…

फिल्म की कहानी एक ऐसे लड़के की है जो देख नहीं सकता, लेकिन सब कुछ महसूस कर सकता है. लड़के का नाम जहान है, जिसका किरदार विक्रांत मैसी ने निभाया है. जहान एक संगीतकार है और एक दिन मसूरी जाते समय ट्रेन में उसकी मुलाकात सबा नाम की एक लड़की से होती है. सबा का किरदार शनाया कपूर निभा रही हैं. शनाया पेशे से एक थिएटर आर्टिस्ट हैं और बॉलीवुड में नाम कमाना चाहती हैं. वह एक ऑडिशन की तैयारी के लिए मसूरी जा रही हैं. सबा को एक ऐसी लड़की का ऑडिशन देना है जो देख नहीं सकती, इसलिए वह ट्रेन में आंखों पर पट्टी बांधकर सफर कर रही हैं.

सबा को इस बात का अंदाजा नहीं है कि जहान देख नहीं सकता. ट्रेन में जहान और सबा की दोस्ती मसूरी पहुंचकर कब प्यार में बदल जाती है, दोनों को ही पता नहीं चलता. फिर एक दिन कुछ ऐसा होता है कि जहान सबा की जिंदगी से हमेशा के लिए दूर चला जाता है. इसके बाद क्या होता है? यह जानने के लिए आपको पूरी फिल्म देखनी होगी.

वैसी फिल्म की कहानी की बात करें तो आपको इसमें कुछ भी ऐसा नहीं मिलेगा जो आपको चौंका दे. कहानी में कुछ नयापन तो नहीं है, लेकिन विक्रांत मैसी की एक्टिंग फिल्म की कुछ कमजोर कड़ियों को बचाने में जरूर कामयाब रही है. शनाया का अभिनय ठीक-ठाक है, लेकिन उन्हें अभी और समय चाहिए. इस फिल्म को देखने के बाद मैं इतना जरूर कहूंगा कि शनाया गंभीर भूमिकाएं तो बखूबी निभा सकती हैं, लेकिन रोमांटिक भूमिकाओं के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी होगी.

फिल्म का पहला भाग काफी धीमा है. कहानी इतनी धीमी गति से आगे बढ़ती है कि आपको बोरियत महसूस होने लगेगी, लेकिन दूसरे भाग से कहानी गति पकड़ती है और काफी दिलचस्प हो जाती है. क्लाइमेक्स तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म की कहानी काफी इमोशनल हो जाती है. वैसे, जहान और सबा की प्रेम कहानी आपको पसंद आएगी. स्पष्ट रूप से कहें तो शनाया की इस पहली फिल्म की कमान विक्रांत मैसी ने ही संभाली है.

निर्देशन की बात करें तो संतोष सिंह ने छोटी-छोटी बातों पर भी खूब ध्यान दिया है. फिल्म की ज्यादातर शूटिंग मसूरी में हुई है और उन्होंने जो दृश्य अपने कैमरे में कैद किए हैं, वो सभी लोकेशन आपको बड़े पर्दे पर देखने में पसंद आएंगी. साथ ही, विशाल मिश्रा का संगीत भी इस फिल्म की कमजोर कड़ियों को संभालने में कामयाब रहा है. कुल मिलाकर, ‘आंखों की गुस्ताखियां’ एक औसत फिल्म है. मेरी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार.

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Pratik Shekhar

Pratik Shekhar is leading the entertainment section in News18 Hindi. He has been working in digital media for the last 12 years. After studying from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Co…और पढ़ें



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