बॉलीवुड फिल्में पहले जैसी बॉक्स ऑफिस पर सफलता क्यों नहीं हासिल कर पा रही हैं? हम पिछले तीन-चार सालों से इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन बॉलीवुड से जुड़े हर व्यक्ति को ऋषभ शेट्टी की फिल्म ‘कांतारा चैप्टर 1’ से सबक लेना चाहिए. अगर हम समय के साथ नहीं ढलेंगे, तो हम पिछड़ते ही जाएंगे और आज बॉलीवुड के साथ यही हो रहा है. हमें इस बात पर चर्चा शुरू करनी चाहिए कि साउथ इंडियन फिल्में इंडियन बॉक्स ऑफिस पर लगातार सफलता क्यों हासिल कर रही हैं? ऋषभ ने कितनी शानदार फिल्म बनाई है. वह न सिर्फ निर्देशक हैं, बल्कि लीड एक्टर भी हैं. इतने दोहरे दबाव में वह ‘कांतारा चैप्टर 1’ जैसी फिल्म दर्शकों तक पहुंचा रहे हैं, और वह प्रशंसा के पात्र हैं. न डायरेक्शन में कमी और एक्टिंग में जोश की… ऋषभ शेट्टी ने एक बार फिर साबित किया है कि आस्था से जुड़ी फिल्मों से भी लोगों को आसानी से जोड़ा जा सकता है.
इसे देखना अपने आप में एक बिल्कुल अलग अनुभव है. कहना पड़ेगा, भारतीय सिनेमा ने सच में यहां पर एक नया मुकाम हासिल किया है. इसे मास्टरपीस कहना बिल्कुल सही लगेगा, क्योंकि अब तक कोई भी फिल्म इतनी शानदार तरह से हाई-कंटेंट और मास एलीमेंट्स का संतुलन नहीं बना पाई है, वो भी खासकर कुल देवताओं पर. यह एक ऐसी फिल्म है जो आपको पूरी तरह अपने दुनिया और कहानी में डुबो देती है. यह सच में आपको उस युग में ले जाती है जहां अलग-अलग दुनिया आपस में टकराती हैं.
यह विज़ुअल्स के लिहाज से रोमांचक अनुभव है. बैकग्राउंड म्यूजिक (BGM) शुरुआत से अंत तक आइकॉनिक है, हर जगह बिल्कुल सही है, और यह आपको जबरदस्त रोमांच महसूस कराता है. मेकर्स ने ट्रेलर में कुछ भी खुलासा न करके कमाल कर दिया. मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह साल 2022 में आई ‘कांतारा’ से बेहतर होगी, क्योंकि ट्रेलर देखकर मैं बहुत ज्यादा कंफ्यूज्ड हो गया था, लेकिन फिल्म पूरी तरह अलग लेवल पर है. कहानी की डिटेलिंग और गहराई देखकर आप हैरान रह जाएंगे. दूसरी इंस्टॉलमेंट के हिसाब से, यह ग्रैंडर लेवल में किसी भी फिल्म से आगे निकल जाती है. फिल्म लगातार दिलचस्प बनती रहती है, खासकर सेकंड हाफ में, जो आपको लगातार चौंकाती रहेगी. इंटरवल का समय भी बिल्कुल सही है. वहीं, जानवरों के साथ दिखाए गए सीक्वेंस तकनीकी नजरिए से कमाल के हैं. वीएफएक्स तो आपको हॉलीवुड फिल्मों का अहसास दिलाती है.
‘कांतारा चैप्टर वन’ की कहानी ‘कांतारा’ से पहले की कहानी बताती है. सबसे ज्यादा दमदार आखिरी के 15 मिनट के क्लाइमैक्स हैं, जो आपको सच में एक रहस्यमय दुनिया में ले जाता है, पूरी तरह से उसकी दिव्यता में डुबो देता है. भारतीय संस्कृति को जिस भव्यता और शानदार तरीके से दिखाया गया है, वह कमाल है. यह शैतान पर भगवान की शक्ति को शानदार ढंग से दिखाता है. स्क्रीन पर जो दिखाया गया है, वह भावनाओं को बहुत गहराई से छूता है और रोंगटे खड़े कर देता है. यह आपके हैरान करने के साथ सोचने पर मजबूर कर देगा. इन सबके बावजूद फिल्म में कुछ कमियां भी हैं, जैसे फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो है, जिससे आप बीच-बीच में थोड़ा बोर भी होने लगते हैं, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह और मजेदार और रोमांचक बनती जाती है. वहीं, फिल्म संगीत तो अच्छे हैं लेकिन हिंदी पट्टी वालों को थोड़ा निराश जरूर करेगी.
वैसे, होम्बले फिल्म्स ने फिर से कमाल कर दिया है, और इस बार शानदार तरीके से. केजीएफ 1, केजीएफ 2, कांतारा, सालार और महावीर नरसिम्हा जैसी ब्लॉकबस्टर्स देने के बाद, मेकर्स ने इस मास्टरपीस को पेश करते हुए अपना स्टैंडर्ड और भी ऊंचा कर दिया है. ऋषभ शेट्टी ने सिर्फ एक्टिंग नहीं की है बल्कि उन्होंने भगवान जैसा रूप दिखाया है. अगर कांतारा के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला, तो यह उससे भी आगे है. गुलशन देवैया ने कुलशेखर के रोल में अपनी मौजूदगी दिखाते हुए, किरदार में गहराई लाई है. वहीं, रुक्मिणी वसंत अपने अलग और नए किरदार में कमाल लग रही हैं. यह एक दिल को छू लेने वाला सफर है, जो लोककथाओं, विश्वास और इंसानी भावनाओं की दुनिया में ले जाती है. फिल्म अपने हर हिस्से को खूबसूरती से जोड़ती है, जिससे कहानी और भी मजेदार बन जाती है. आपको यह फिल्म अपने पूरे परिवार के साथ देखनी चाहिए और ‘कांतारा: चैप्टर 2’ का इंतजार करना चाहिए. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 4 स्टार.