Kesari Veer Review: सूरज पंचोली ने फिल्म केसरी वीर से बड़े पर्दे पर वापसी की है. 14वीं शताब्दी की पृष्ठभूमि पर बनी ‘केसरी वीर’ 2 घंटे 41 मिनट की एक ऐतिहासिक ड्रामा है, जो सोमनाथ मंदिर पर हुए हमलों की कहानी कहती है. जब मुस्लिम आक्रमणकारी जफर खान ने मंदिर को निशाना बनाया था. इस फिल्म में सूरज पंचोली राजपूत राजा हमीरजी गोहिल की भूमिका निभा रहे हैं, जो भगवान शिव के भक्त योद्धा वेगड़ा जी के साथ मिलकर जफर खान और उसकी सेना से लड़ते हैं. लेकिन, दुर्भाग्यवश, यह फिल्म उनकी विरासत के साथ न्याय करने में बुरी तरह विफल होती है.
प्रिंस धीमान द्वारा निर्देशित और लिखित इस फिल्म में दृष्टि और समन्वय की कमी है. कहानी बिखरी हुई है, किरदार अधूरे हैं और कुल मिलाकर एग्जीक्यूशन भ्रमित करने वाला है. शुरुआत से ही यह कहानी दर्शकों को जोड़ने में असफल रही. नतीजा ये हुआ कि यह प्लॉट, जो एक महान वास्तविक जीवन के हीरो पर आधारित है वो पर्दे पर उबाऊ और निराशाजनक लगता है.
संजय लीला भंसाली की करनी चाही नकल
फिल्म को देखने के बाद इसके डायरेक्शन में भी कमी नजर आती है, संभवतः बजट की सीमाओं के कारण ये हो सकता है. फिल्म संजय लीला भंसाली के भव्यता की नकल करने की कोशिश करती है, लेकिन बुरी तरह से असफल रही. विजुअल इफेक्ट्स और ग्राफिक्स खराब मोहित नहीं कर सके, जिससे कई महत्वपूर्ण सीन कार्टून जैसे लगते हैं. वीएफएक्स ड्रामा या युद्ध के सीन को बढ़ाने के बजाय, उन्हें कमजोर कर देता है.
जबरदस्ती का म्यूजिक
‘केसरी वीर’ का सबसे परेशान करने वाला पहलू, इसका अनावश्यक इस्तेमाल किया म्यूजिक है. जो अक्सर डायलॉग्स और सीन्स को दबा देता है. कहानी में बिखरे हुए कई गाने कोई खास कमाल नहीं करते और फिल्म की पहले से ही धीमी गति में और भी बाधा डालते हैं.
एक्टिंग में नहीं जानदार
एक्टिंग भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरी. प्रिंस धीमान के कमजोर निर्देशन को मुख्य कलाकारों की खराब एक्टिंग का पूरा साथ मिला है. सूरज पंचोली और आकांक्षा शर्मा के चेहरों पर तो जैसे कोई एक्सप्रेशन ही नहीं आता. खुशी, दुख, गुस्सा, दर्द… हर फीलिंग को वो एक ही बेजान अंदाज में दिखाते हैं. विवेक ओबेरॉय, जो खलनायक की भूमिका में हैं, उनका रोल रणवीर सिंह के पद्मावत के अलाउद्दीन खिलजी की नकल जैसा लगता है, जिसमें गहराई बिलकुल नहीं है. सुनील शेट्टी फिल्म में गंभीरता जोड़ सकते थे, लेकिन फिल्म की कहानी वो लोगों को जोड़ नहीं सके.
कई मोर्चों पर फेल है फिल्म
कुल मिलाकर, केसरी वीर एक निराशाजनक फिल्म है जो कई मोर्चों पर फेल है, चाहे वह कहानी हो, एक्टिंग हो, निर्देशन हो या एग्जीक्यूशन हो. एक भूले-बिसरे नायक का जश्न मनाने के नेक इरादे के बावजूद, ये फिल्म एक बिखरी और थकाऊ बनकर रही गई. एक ऐतिहासिक कहानी के लिए आवश्यक है कि इसमें निपुणता, भावना और समन्वय की हो, जो फिल्म में नहीं था. इसलिए इस फिल्म को बिना किसी हिचकिचाहट के छोड़ दें. यह न तो मनोरंजन करती है और न ही जानकारी देती है.