‘स्त्री 2’, ‘विक्की विद्या का वो वाला वीडियो’ और ‘भूल चूक माफ’… लगातार कॉमेडी फिल्मों के बाद राजकुमार राव अचानक एक गैंगस्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं. कॉमेडी से गंभीर किरदार में खुद को ढालना राजकुमार के लिए आसान नहीं रहा होगा… और उनकी मेहनत फिल्म ‘मालिक’ में साफ दिखाई दे रही है. आज यानी 11 जुलाई 2025 को एक्शन ड्रामा फिल्म ‘मालिक’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है और अगर आप इस फिल्म को देखने का प्लान बना रहे हैं, तो उससे पहले जान लें कि कैसी है ये फिल्म?
फिल्म की कहानी इलाहाबाद के एक गैंगस्टर मालिक पर आधारित है, जिसका किरदार राजकुमार राव निभा रहे हैं… जो एक किसान परिवार से आता है और उसका असली नाम दीपक है. कैसे वह एक साधारण लड़के दीपक से गैंगस्टर मालिक बनता है, यह फिल्म में बखूबी दिखाया गया है, लेकिन फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी गति है, लेकिन राजकुमार ने अपने किरदार के साथ न्याय जरूर किया है.
फिल्म में दीपक के दोस्त के किरदार में अंशुमान पुष्कर नजर आ रहे हैं, जिनका फिल्म में अहम रोल है. फिल्म की कहानी 80-90 के दशक में सेट है. दीपक के पिता एक किसान हैं, जिन पर एक जानलेवा हमला होता है और दीपक बीच बाजार में सबके सामने हमलावर को मारकर मालिक बन जाता है. मालिक एक ऐसा गैंगस्टर है, जिसका खौफ पुलिस प्रशासन ही नहीं, बल्कि सभी राजनेता भी रखते हैं.
मालिक बनने से पहले दीपक की शादी विद्या से होती है, जिसका किरदार मानुषी छिल्लर ने निभाया है. मानुषी का स्क्रीन स्पेस थोड़ा कम है, लेकिन वह फिल्म में अच्छी लगी हैं और राजकुमार के साथ उनकी केमिस्ट्री भी आपको पसंद आएगी. फिल्म में सौरव शुक्ला की भी अहम भूमिका है, जिसमें वह एक नेता शंकर सिंह का किरदार निभा रहे हैं. कहीं न कहीं दीपक को मालिक बनाने में शंकर का बड़ा हाथ है. वहीं, मशहूर बंगाली फिल्म अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में जंच रहे हैं, लेकिन उनके किरदार को थोड़ा और बेहतर ढंग से सजाया जा सकता था.
सौरभ सचदेवा चंद्रशेखर की भूमिका में नजर आ रहे हैं, जो मालिक को टक्कर देते हैं, जो फिल्म में मालिक की जगह लेना चाहता है. सही मायनों में फिल्म का मुख्य खलनायक चंद्रशेखर ही है, जो मालिक के हर काम में दखल देता है. फिल्म में हुमा कुरैशी का एक आइटम नंबर भी रखा गया है, लेकिन वह बस टाइमपास जैसा लगता है. फिल्म के कमजोर पहलू की बात करें तो जैसा कि मैंने कहा, इसकी गति ही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है. अगर मेकर्स इस फिल्म की अवधि थोड़ी कम कर देते, तो यह एक बेहतरीन फिल्म बनकर उभरती, हालांकि इंटरवल के बाद फिल्म थोड़ी गति पकड़ने में कामयाब होती है, लेकिन क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते यह फिर से धीमी हो जाती है.