नेटफ्लिक्स पर साल 2020 में आई फिल्म ‘रात अकेली है’ को काफी पसंद किया गया था. सस्पेंस से भरपूर इस फिल्म की कहानी काफी दमदार भी थी, जिसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राधिका आप्टे, श्वेता त्रिपाठी, आदित्य श्रीवास्तव, तिग्मांशु धूलिया और शिवानी रघुवंशी मुख्य भूमिका में थे. वहीं, अब नेटफ्लिक्स पर इसका सीक्वल रिलीज किया गया है, जिसका नाम है ‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’. फिल्म का सीक्वल भी आप सभी को काफी पसंद आने वाला है. यह बिना किसी तेज-तर्रार शोर वाली थ्रिलर की तरह नहीं, बल्कि एक ठहरे हुए, सधी हुई और असरदार अंदाज में आगे बढ़ने वाली क्राइम-ड्रामा है.

इस बार फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ चित्रांगदा सिंह, रजत कपूर, संजय कपूर, अखिलेंद्र मिश्रा और रेवती अहम भूमिकाओं में हैं. कहानी की शुरुआत बंसल परिवार में हुए रहस्यमय हत्याकांड से होती है. इस उलझे केस की जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर जटिल यादव (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) को सौंपी जाती है. देखने में साधारण लगने वाला यह मामला जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे अमीरी के मुखौटे के पीछे छुपी संकीर्ण सोच, हवेली के बंद दरवाजे और दबी हुई सच्चाइयां सामने आने लगती हैं. आगे की परतें क्या मोड़ लेती हैं, यह जानने के लिए फिल्म देखना ही बेहतर है.

अभिनय की बात करें तो नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं. उनका इंस्पेक्टर न तो सुपरहीरो है और न ही भाषणबाज, वह एक ऐसा आम आदमी है, जो अपने पेशे के साथ-साथ अपनी निजी टूटन से भी जूझ रहा है. यही सादगी उनके अभिनय को बेहद विश्वसनीय बनाती है. चित्रांगदा सिंह ने अपने किरदार को गहराई और गरिमा के साथ निभाया है. सहायक भूमिकाओं में संजय कपूर, रजत कपूर, अखिलेंद्र मिश्रा, प्रियंका सेतिया, दीप्ति नवल और रेवती सभी अपनी-अपनी छाप छोड़ते हैं.

निर्देशन के मोर्चे पर हनी त्रेहान पूरी तरह सफल रहते हैं. फिल्म की रियलिस्टिक ट्रीटमेंट, टाइट स्क्रीनप्ले और सधी हुई सिनेमैटोग्राफी इसे खास बनाती है. बैकग्राउंड स्कोर कहानी के मूड को बिना हावी हुए मजबूती देता है, लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी रफ्तार है. फिल्म की रफ्तार शुरुआत से ही धीमी है, चूंकि इसकी लंबाई कम होने की वजह इस बात पर अगर गौर न की जाए तो भी चलेगा. वैसे, कुछ-कुछ जगह रफ्तार आपको बोर भी सकता है. दूसरी कमियां इसकी संगीत है, मेकर्स ने इस फिल्म की संगीत पर ज्यादा ध्यान देना उचित नहीं समझा क्योंकि फिल्म थोड़ी सीरियस है, फिर अगर कुछ अच्छे गाने इसमें डाले जाते तो ये भारतीय दर्शकों को थोड़ा और एंटरटेन करने में सफल रहती.

कुल मिलाकर देखा जाए तो ‘रात अकेली है – द बंसल मर्डर्स’ एक ऐसी क्राइम-ड्रामा है जो अंत में धमाका नहीं करती, बल्कि कई सवाल छोड़ जाती है. यह अपने पहले पार्ट से भी ज्यादा परिपक्व और प्रभावशाली नजर आती है और एक मजबूत मर्डर मिस्ट्री फ्रेंचाइज बनने की पूरी क्षमता रखती है. RSVP और नेटफ्लिक्स की यह साझेदारी, लस्ट स्टोरीज और मिसमैच्ड के बाद एक बार फिर दर्शकों को सोचने पर मजबूर करने वाला कंटेंट देने में कामयाब होती है. अगर आपको धीमी, गंभीर और दिमाग में उतरने वाली क्राइम फिल्में पसंद हैं तो यह फिल्म जरूर देखें. मेरी ओर से इस फिल्म को 3.5 स्टार.



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